शेहरा, छोटा उदयपुर और संतरामपुर से चल रहे एक्सटॉर्शन और टिम्बर चोरी के रैकेट का पर्दाफाश: मंजीपुरा रिंग रोड पर वे ब्रिज पर बड़ी कार्रवाई
नडियाद: गुजरात में प्रकृति की कीमत पर हरियाली खत्म कर रहे तस्करों और टिम्बर माफियाओं के खिलाफ फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने अब सख्त रवैया अपनाया है। खेड़ा जिले के नडियाद पंथक से गैर-कानूनी तरीके से और बिना परमिट के पेड़ काटकर लाई गई लकड़ी से भरे पांच बड़े ट्रकों को नडियाद रेंज की इंचार्ज फॉरेस्ट ऑफिसर मनीषा वाघेला की टीम ने जब्त कर लिया है। इस बड़ी कार्रवाई से नडियाद और आसपास के इलाकों में गैर-कानूनी लकड़ी के व्यापार में शामिल लोगों में काफी दहशत फैल गई है।
लकड़ी के ट्रक कहां से आ रहे थे?
मिली जानकारी के मुताबिक, पंचमहल और महिसागर पंथक के जंगलों और आसपास के इलाकों को बंधक बनाकर टिम्बर माफिया एक्टिव हो गए हैं। शेहरा (गोधरा), छोटा उदयपुर और संतरामपुर जैसे जंगल के इलाकों से कीमती पेड़ों की गैर-कानूनी कटाई (अंधाधुंध कटाई) की जाती है। इसके बाद, इस गैर-कानूनी लकड़ी को ट्रकों में भरकर बिना किसी वैलिड परमिट, पास या डॉक्यूमेंट्री सबूत के नीलामी या बिक्री के लिए नडियाद लाया जाता था।
फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को खास जानकारी मिली थी कि डेवलपमेंट के नाम पर पर्यावरण का नुकसान करने वाले ये तस्कर बिना रोक-टोक लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं।
मंजीपुरा रिंग रोड पर संतराम वे ब्रिज के पास जाल बिछाया गया
फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम को मिली जानकारी के आधार पर, नडियाद रेंज इंचार्ज फॉरेस्ट ऑफिसर मनीषा वाघेला और उनकी टीम ने नडियाद में मंजीपुरा रिंग रोड पर ‘नडियाद सॉ मिल ओनर्स एसोसिएशन से मंज़ूर’ संतराम वे ब्रिज के पास निगरानी रखी। जानकारी के मुताबिक, लकड़ी से लदे कुल पांच ट्रकों को एक के बाद एक संदिग्ध हालत में गुजरते हुए रोका गया और उनकी जांच की गई। जब यह बात सामने आई कि ट्रक ड्राइवरों या व्यापारियों के पास लकड़ी की तस्करी के लिए कोई कानूनी कागज़ात या परमिट नहीं थे, तो फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी पांच ट्रक और लकड़ी को ज़ब्त कर लिया।
बड़ा सवाल: गैर-कानूनी तरीके से लकड़ी खरीदने वाली आरा मिलों पर कार्रवाई कब होगी?
इस रेड के बाद अब लोगों में यह बहस तेज़ हो गई है कि अगर लकड़ी लाने वाले ट्रक ड्राइवर और व्यापारी पकड़े गए हैं, तो नडियाद और आस-पास के इलाकों में चल रही कौन सी आरा मिल यह गैर-कानूनी लकड़ी खरीदने वाली थीं? यह लकड़ी किन आरा मिलों में बिना परमिट के इस्तेमाल के लिए लाई गई थी? प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले और गैर-कानूनी लकड़ी खरीदने वाले मुख्य माफिया और आरा मिल संचालकों पर कब और क्या कार्रवाई होगी, यह एक बड़ा सवाल है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की इस सख्त कार्रवाई ने लकड़ी चोरों के सिंडिकेट को चुप करा दिया है। ‘पाको गुजरात’ ऐसे तत्वों के खिलाफ आवाज़ उठाता रहेगा जो पर्यावरण और जंगलों की चोरी कर रहे हैं और इस मामले के अगले अपडेट भी आपको देगा।

