विपक्षी पार्टियों कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) ने कड़ा विरोध जताया: नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचलने का आरोप, लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में सरकारी नौकरियों की भर्ती और नीतियों में इतना बड़ा और विवादित बदलाव किया है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भारी हलचल मच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी नौकरी भर्ती नियमों में किए गए नए संशोधन के अनुसार, अगर कोई युवा उम्मीदवार सरकार के खिलाफ विरोध, आंदोलन या किसी विवादित गतिविधियों में शामिल होता है या पुलिस वेरिफिकेशन में उसके खिलाफ किसी विरोध का रिकॉर्ड है, तो उसे सरकारी नौकरियों के लिए अयोग्य माना जाएगा और उसे नौकरी नहीं मिलेगी।
नए नियमों को लेकर सरकार का नजरिया और विवाद
सरकार के इस नए पॉलिसी फैसले के पीछे तर्क यह है कि सरकारी सेवाओं में शामिल होने वाले युवा अनुशासित और कानून का पालन करने वाले हों। हालांकि, जैसे ही यह फैसला सामने आया, पूरे देश में और खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारी हंगामा मच गया है। विपक्षी पार्टियों ने सरकार के इस कदम को लोकतंत्र विरोधी और तानाशाही बताया है।
कांग्रेस और SP का कड़ा विरोध
इन नए नियमों के खिलाफ विपक्षी पार्टियां आक्रामक मूड में आ गई हैं। समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है।
समाजवादी पार्टी लीडरशिप ने आरोप लगाया है कि BJP सरकार युवाओं की आवाज दबाने और शांति से विरोध करने के उनके बुनियादी अधिकारों को छीनने के लिए ऐसे काले कानून ला रही है। अगर कोई युवा बेरोजगारी, महंगाई या सरकारी नीतियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करता है, तो उसे सरकारी नौकरी से वंचित करना संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
कांग्रेस पार्टी ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के अपने वादों में फेल रही है और उन्हें नौकरी देने से रोकने के लिए ऐसे दमनकारी और मनमाने नियम बना रही है। सरकार नौकरियों को विपक्ष की आवाज दबाने के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है, जिसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। युवाओं में चिंता और भविष्य को लेकर सवाल
UP में बेरोज़गारी झेल रहे लाखों नौकरी की चिंता कर रहे युवाओं में इस नियम के खिलाफ़ बहुत गुस्सा और चिंता है। सरकारी नौकरी पाने के लिए सालों से मेहनत कर रहे युवाओं का कहना है कि अगर सरकार के खिलाफ़ आवाज़ उठाने पर रोक लगा दी गई तो लोकतंत्र में आम नागरिकों के अधिकारों का क्या होगा? पूरी संभावना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गर्मी और बढ़ेगी।

