बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई के लोगों के लिए स्वच्छ और ताजी हवा की जरूरत पर जोर दिया और मशहूर हस्तियों से स्वेच्छा से जागरुकता फैलाने की सोमवार को अपील की।
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिवाली पर पटाखों से निकलने वाली जहरीली गैसों के कारण मुंबई की हवा की गुणवत्ता और खराब होने की आशंका के बीच जन जागरूकता पर जोर दिया है। अदालत ने कहा कि मुंबई ने सेलिब्रिटी को बहुत कुछ दिया है। ऐसे में शहर के प्रति अपनेपन की भावना से उन्हें प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियान में खुद आगे आना चाहिए। इसके लिए उनकी सेवाएं मुफ्त में ली जानी चाहिए और सरकारी खजाने से उन पर कोई खर्च नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मुंबई पुलिस के कार्यक्रमों में सेलिब्रिटी अपनी सेवाएं देते है। ऐसे ही उन्हें प्रदूषण के मुद्दे पर खुद आगे आना चाहिए। प्रशासन इस मामले में चाहे तो मराठी सेलिब्रिटी की भी मदद ले। हाईकोर्ट ने नगर सेवकों से भी विशेष रूप से झुग्गी-बस्तियों में लोगों को प्रदूषण के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के लिए आगे आने को कहा। पिछले सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर लगी रोक पूरे साल और सभी त्योहारों पर लागू होगी। प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी एसओपी तैयार कर इसे कड़ाई से लागू किया जाए। कोर्ट ने इस मामले का स्वतः: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है।
अदालत ने निर्देश दिया कि इस संबंध में महानगरपालिका आयुक्त और संबंधित अधिकारी नगरसेवकों के साथ बैठक करें, ताकि जागरूकता अभियान को प्रभावी बनाया जा सके। इससे पहले प्रदूषण के संबंध में बीएमसी कमिश्नर, मुंबई पुलिस और एमपीसीबी की ओर से प्रदूषण को रोकने के लिए अदालत के निर्देशों के पालन को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत को दी गई। सरकारी वकील ने कहा कि सेलिब्रिटी मामले में सेवा के लिए शुल्क की मांग कर सकते है, इसलिए अभी इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए है। इस पर जस्टिस गिरीश कुलकर्णी की बेंच ने कहा कि सेलिब्रिटी को इस मामले में खुद से आगे आना चाहिए।
बेंच ने कहा कि मुंबई की हवा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए केवल उपायों की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही तरीके से क्रियान्वयन भी जरूरी है। बेंच ने कहा कि बीएमसी कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख की ओर से अब तक उठाए गए कदम संतोषजनक और सराहनीय दिख रहे हैं। हालांकि, इन उपायों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना होगा, तभी मुंबई में अपेक्षाकृत स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। सांसों के लिए संकट बनने वाले प्रदूषण पर काबू पाया जा सकेगा।
सुनवाई के दौरान तीनों प्रशासनिक प्रमुखों ने बेंच के समक्ष अपने-अपने विभागों की ओर से उठाए गए कदमों का प्रेजेंटेशन किया। उन्होंने हलफनामे के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण के उपायों और उनके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी भी अदालत को दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों की भागीदारी और व्यापक जन जागरूकता भी आवश्यक है। बता दें अदालत ने निर्देश दिया है कि स्कूलों में और त्योहार शुरू होने से पहले बसों, बस स्टॉप, रेलगाड़ियों तथा अन्य उपयुक्त स्थानों पर प्रदूषण के कुप्रभाव को लेकर जागरूकता संदेश प्रदर्शित किए जाएं। अभियान में फिल्मी हस्तियों की मदद लेने पर भी विचार हो। मगर बेंच ने कहा कि हमें जो स्थिति दिखती है उसे देख कर लगता है कि अधिकारी किसी अलग दुनिया में रहते है,जिन्हें प्रदूषण पर लगाम लगाने को लेकर जारी हमारे आदेश का उल्लंघन नहीं दिखाई देता है।
शिकायतों के लिए बने अलग व्यवस्था
एमपीसीबी और पुलिस विभाग को नागरिकों की शिकायतें सुनने के लिए अलग शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई जाए। इसके तहत अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर और प्रत्येक वार्ड के लिए अलग ई-मेल आईडी उपलब्ध कराए जाए।कलेक्टर, महानगरपालिका कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर को आदेश के पालन के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त हो। अधिकारियों के नाम भी सार्वजनिक हो। ताकि नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें।

