गुजरात की धरती से शुरू हुआ करप्शन और फ्रॉड अब सीधे देश की राजधानी दिल्ली के पावर कॉरिडोर तक पहुंच गया है। ‘पक्को गुजरात’ की सबसे चौंकाने वाली और विस्फोटक जांच के मुताबिक, गुजरात के पवित्र तरंगा पर्वत और प्राकृतिक खजाने के नाम पर दिल्ली में एक गुजराती कंपनी द्वारा बड़ा स्कैम किया जा रहा है। यह खुलासा हुआ है कि गुजरात का साधारण बोर का पानी देश के बड़े अधिकारियों और हाई-प्रोफाइल सर्कल के ऑफिसों में भारी कीमत पर बेचा जा रहा है।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि जब यह रैकेट पकड़ा गया और संबंधित कंपनी को लीगल नोटिस जारी किया गया, तो गंभीर रिपोर्ट सामने आई हैं कि आम नागरिकों की तरह कानून का पालन करने के बजाय, ‘VIP कनेक्शन’ का गलत इस्तेमाल करके पूरे मामले को दिल्ली के टॉप लेवल से दबा दिया गया। ये है असली खेल: 499 रुपये प्रति लीटर और दूध से 7 गुना महंगा!
चुनाव कमिश्नरों के सामने टेबल पर कांच की पानी की बोतलें रखी दिखती हैं, जिन्हें ‘AAVA’ नाम से बेचा जाता है। कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, 250 ML पानी की 8 बोतलें 999 रुपये में मिल रही हैं, यानी एक लीटर पानी सीधे 499 रुपये का! जहां साधारण ब्रांडेड पानी की बोतल 15 से 20 रुपये में मिलती है, वहीं ये पानी एक लीटर दूध से 7 गुना महंगे दाम पर बेचा जा रहा है।
कंपनी अपनी वेबसाइट पर बड़े-बड़े दावे करती है कि ये पानी, गाद और मिट्टी की अलग-अलग परतों से नैचुरली फिल्टर होकर, प्रोटेक्टेड इकोसिस्टम के बीच मौजूद अंडरग्राउंड एक्वीफर्स तक पहुंचता है, और इसका एल्कलाइन pH 8 है। लेकिन असली स्कैम ये है कि इन लुभावने दावों की आड़ में, तरंगा पहाड़ की तलहटी या आस-पास के साधारण बोरवेल से साधारण पानी को पैक करके दिल्ली के हाई-प्रोफाइल ऑफिसों में सोने के भाव बेचा जा रहा है! ‘बोरहोल का पानी’ और तरंगा पर्वत के नाम पर लूट का धंधा
गुजरात में मेहसाणा और बनासकांठा के बॉर्डर पर मौजूद ऐतिहासिक और धार्मिक तरंगा पर्वत अपनी प्राकृतिक पवित्रता के लिए जाना जाता है। लेकिन इसी मान्यता की आड़ में धंधेबाजों द्वारा जनता के साथ गंभीर छेड़छाड़ की जा रही है। इस बोरहोल के पानी को आकर्षक बोतलों में भरकर, ‘पवित्र तरंगा पर्वत प्राकृतिक पानी’ का लेबल लगाकर सीधे दिल्ली भेजा जाता है। यह पानी ज्ञानेश कुमार साहेब के ऑफिस समेत VVIP कॉम्प्लेक्स में 499 रुपये प्रति लीटर की भारी कीमत पर सप्लाई किया जाता है, जहां देश के बड़े चुनाव कमिश्नर और एडमिनिस्ट्रेटिव हेड बैठते हैं, और अधिकारी भी इसे मजे से खरीदकर पीते हैं!
घोटाला पकड़े जाते ही दिल्ली लेवल पर ‘VIP फोन कॉल’ किए गए और मामला सुलझ गया!
जब हाई-प्रोफाइल पानी घोटाले का खुलासा हुआ और कंज्यूमर प्रोटेक्शन और फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की नजर इस कंपनी पर पड़ी, तो एडमिनिस्ट्रेशन ने तुरंत इस कंपनी को सख्त नोटिस जारी किया। नियमों के मुताबिक, झूठे दावे करके महंगे दाम पर पानी बेचने पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन जैसे ही नोटिस जारी हुआ, उस गुजराती कंपनी के मालिक एक्टिव हो गए। गुजरात से लेकर दिल्ली तक के पॉलिटिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव रिश्ते काम पर लगा दिए गए। दिल्ली के टॉप लेवल से फोन करके दावा किया गया कि ‘हम VIP हैं’, और इस गंभीर मामले को कागजों में दबा दिया गया। नोटिस जारी करने वाले अधिकारियों को भी ऊपर से दबाव देकर चुप करा दिया गया है।
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ का सीधा सवाल: क्या कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ इस गंभीर जांच के ज़रिए सीधे सवाल उठाता है:
- क्या दिल्ली के VIP ऑफिसों में गुजरात के बोर के पानी को 499 रुपये प्रति लीटर के दाम पर बेचने की इजाज़त इस सरकार के किस आशीर्वाद से मिली है?
- तरंगा पर्वत के नाम पर करोड़ों रुपये का यह घोटाला करने वालों के खिलाफ कानूनी क्रिमिनल कार्रवाई क्यों रोक दी गई?
- कानून तब सख्त हो जाता है जब कोई आम बिजनेसमैन छोटी सी गलती करता है, तो फिर इस कथित ‘VIP कंपनी’ के लिए कानून की किताबें क्यों बदली जाती हैं? ”महानगर मेट्रो न्यूज़” गुजरात के लोगों के साथ हो रही इस धोखाधड़ी और दिल्ली की अदालत में खेले जा रहे इस भ्रष्ट खेल को उजागर करता रहेगा। लोगों के हक और सच्चाई की लड़ाई अब नहीं रुकेगी!

