गुजरात में गिफ्ट सिटी और इसके आसपास की सोसाइटीज कुंवारे छात्रों या कामकाजी युवाओं (विशेषकर महिलाओं) को केवल अविवाहित या फिर सिंगल होने कारण घर किराए पर देने से मना नहीं कर पाएंगी। पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट गिफ्ट सिटी में काम करने के लिए पहुंच रहे पेशेवरों की सुविधा के लिए सरकार तालिबानी नियमों पर अकुंश लगाएगी।
हाइलाइट्स
गिफ्ट सिटी में काम करने वाले सिंगल्स को नहीं रोक पाएंगी सोसाइटीज
अभी किराए पर घर देने से कर देती हैं मना, कंपनियों के सामने मुश्किल
गिफ्ट सिटी अथॉरिटी में उठा मामला, सोसाइटीज की मनमानी पर लगेगी रोक
अहमदाबाद: देश के दूसरे हिस्सों से कामकाज और पढ़ाई के लिए गिफ्ट सिटी का रुख करने वाले पेशेवरों और बैचलर्स को सोसाइटीज किराए पर फ्लैट और रहने देने के लिए मना नहीं कर पाएंगी। गुजरात के अहमदाबाद और गांधीनगर के बीच में स्थित गिफ्ट सिटी की एक कंपनी में कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) ज्यादा होने के बाद अथॉरिटी सोसाइटी के रजिस्ट्रार को औपचारिक रूप से सूचित करने पर भी विचार कर रही है। GIFT सिटी में किसी भी सोसाइटी को ऐसा नियम बनाने की इजाजत न दी जाए जो बैचलर या अकेले रहने वालों को रहने की जगह देने से मना करे। गिफ्ट सिटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। वह इस दुनिया के चुनिंद फिनटेक हब में शामिल करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य के साथ गुजरात सरकार ने गिफ्ट सिटी में कुछ शर्तों के साथ शराब पीने की स्वीकृति भी दी है।
गिफ्ट सिटी में 25,000 लोग करते हैं काम
टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में एक अधिकारी से बातचीत के हवाले से लिखा है कि कर्मचारी दूसरे राज्यों और यहां तक कि दूसरे देशों से GIFT सिटी आते हैं और अक्सर अपने परिवारों को पीछे छोड़ आते हैं। यहां नौकरी या पढ़ाई के रास्ते में रहने की जगह कोई रुकावट नहीं बननी चाहिए। सूत्रों के अनुसार गांधीनगर में GIFT सिटी में कम से कम 25,000 लोग काम करते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में लोग सिंगल या दूसरे राज्यों से आए हुए (माइग्रेंट्स) हैं। सूत्रों ने पुष्टि की कि GIFT सिटी अधिकारियों का सिंगल प्रोफेशनल्स का साथ देने का फैसला, कुंवारे कर्मचारियों को रहने की जगह खोजने में आ रही बढ़ती दिक्कतों के कारण लिया गया है, ताकि पेशेवर गिफ्ट सिटी छोड़कर न जाएं।
सोसाइटी की मनमानी बन रही मुश्किल
एक फिनटेक कंपनी के सूत्र ने बताया कि उनकी कंपनी में कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) ज़्यादा थी क्योंकि गांधीनगर में रहने की जगह खोजने में मुश्किल के कारण कई कर्मचारियों ने दूसरी जगहों पर ट्रांसफर की मांग की थी। सूत्र ने कहा कि GIFT के अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में ये मुद्दे उठाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, GIFT सिटी के कुछ कर्मचारियों को तब परेशानी का सामना करना पड़ा जब GIFT सिटी के बाहर एक रेजिडेंशियल सोसाइटी ने अपने नियम बदलकर PG में रहने की सुविधा बंद कर दी, जिससे अकेले रहने वाले प्रोफेशनल्स को वहां से हटना पड़ा।
गिफ्ट सिटी अथॉरिटी का क्या है प्लान
सूत्रों ने बताया कि पहले कदम के तौर पर अथॉरिटी कोऑपरेटिव सोसाइटीज के रजिस्ट्रार को पत्र लिखने पर विचार कर रही है। वे उनसे दखल देने की मांग करेंगे ताकि यह पक्का किया जा सके कि GIFT सिटी के अंदर किसी भी हाउसिंग सोसाइटी को ऐसे नियम (बाय-लॉज़) अपनाने की इजाजत न मिले जो कुंवारों या अकेले रहने वालों को रहने की जगह देने से मना करते हों। सूत्रों ने पुष्टि की कि यह फैसला GIFT सिटी अधिकारियों की एक नई ‘बिज़नेस अकोमोडेशन पॉलिसी’ शुरू करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इस पॉलिसी का मकसद काम, बिज़नेस, ट्रेनिंग, पढ़ाई और सरकारी कामों के लिए रहने वाले लोगों के लिए GIFT सिटी की रिहायशी यूनिट्स में प्रोफेशनल तरीके से मैनेज किए जाने वाले बिजनेस अकोमोडेशन के लिए एक रेगुलेटेड ढांचा बनाना है।

