राजू करपाड़ा पर तीखे प्रहार: “किसानों के नाम पर राजनीति कर भाजपा में मलाई खाई, जनता चुनाव में जवाब देगी!”
“हिटलरशाही सरकार ED, CBI और क्राइम ब्रांच का डर दिखाकर आंदोलन दबाना चाहती है, लेकिन अब किसान आर-पार की लड़ाई के मूड में!”
गुजरात की राजनीति में किसानों के सुलगते सवालों और आंदोलनों के बीच आम आदमी पार्टी के अग्रणी नेता गोपाल इटालिया ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वरिष्ठ मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के गढ़ समान क्षेत्र में जनता के बीच सरकार के खिलाफ हुंकार भरते हुए गोपाल इटालिया ने सरकार की नीतियों और भाजपा में शामिल हुए पूर्व नेताओं पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि किसान अब डरने वाले नहीं हैं और इस हिटलरशाही के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे हैं।
किसानों का सच्चा नेता कौन? गोपाल इटालिया की बेबाक स्पष्टता
गोपाल इटालिया ने अपने बयान में किसानों के हितों की रक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि, “जो व्यक्ति किसानों के हक और अधिकार के लिए सड़क पर उतरकर लड़ेगा और सरकार के खिलाफ आवाज उठाएगा, केवल वही किसानों का सच्चा और असली नेता माना जाएगा।” किसानों के नाम पर केवल अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने और सत्ता के सौदेबाजी करने वाले नेताओं को अब गुजरात का किसान अच्छी तरह पहचान चुका है।
राजू करपाड़ा पर तीखा हमला: “किसानों की पीठ में घोंपा खंजर”
इस दौरान राजू करपाड़ा पर सीधा निशाना साधते हुए गोपाल इटालिया ने कड़े प्रहार किए कि, जो लोग पहले किसानों की लड़ाई लड़ने के दावे करते थे, वे आज किसानों के नाम पर राजनीति करके भारतीय जनता पार्टी (BJP) में अच्छी जगह और पद पाकर सेट हो चुके हैं। किसानों की पीठ में खंजर घोंपने वाले ऐसे स्वार्थी नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में गुजरात का अन्नदाता मतदान के माध्यम से करारा जवाब देगा।
सरकार की दमनकारी नीतियां और ED-CBI का भय
वर्तमान सरकार पर प्रहार करते हुए इटालिया ने गंभीर आरोप लगाया कि आज गुजरात और देश में हिटलरशाही चलाई जा रही है। जब भी कोई सच्ची आवाज सरकार के खिलाफ उठती है या किसान अपने हक के लिए आंदोलन करते हैं, तब सरकारी तंत्र द्वारा ED (प्रवर्तन निदेशालय), CBI, CID क्राइम और क्राइम ब्रांच जैसी केंद्रीय तथा राज्य की जाँच एजेंसियों के जरिए झूठी कार्रवाई करने की धमकियाँ दी जाती हैं। आंदोलनों को दबाने के लिए भय और आतंक का माहौल पैदा किया जा रहा है, लेकिन अब यह जुल्म नहीं चलेगा।
आर-पार की लड़ाई के मूड में अन्नदाता
समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की दमनकारी नीतियों से अब किसानों का गुस्सा चरम सीमा पर पहुँच चुका है। किसानों के मन से अब किसी का भी डर खत्म हो चुका है और वे अपनी माँगों के लिए सरकार के सामने आर-पार की लड़ाई लड़ने के पूरे मूड में हैं। आने वाले समय में यह विरोध और अधिक उग्र होने की पूरी संभावना है, जिससे राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।

