बिजली कंपनियों की अंधाधुंध वायरिंग और बड़ी लापरवाही से सड़कों पर मौत: एनसीआरबी के चौंकाने वाले आंकड़े व्यवस्था की पोल खोलते हैं
गांधीनगर। गुजरात समेत पूरे देश में बिजली कंपनियों की बड़ी लापरवाही और अंधाधुंध बिछाई गई लाइनें अब लोगों और जंगली जानवरों के लिए मौत का जाल साबित हो रही हैं। हाल ही में, 229 केवी मांजा गांव के भटगाम सबस्टेशन लाइन के पास तार टूटने की घटना ने व्यवस्था के रखरखाव के काम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये हादसे, जिन्हें सरकारी कार्यालय ‘दुर्घटनावश बिजली का झटका’ के तौर पर दर्ज करता है, असल में वहीवटदारी लापरवाही का नतीजा हैं।
एनसीआरबी के चौंकाने वाले आंकड़े: देश में हर दिन 30 लोगों की करंट लगने से मौत
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक: 10 साल में 1.1 लाख मौतें: 2011 से 2020 तक 10 साल के समय में पूरे भारत में करंट लगने से 1,10,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई। हर साल 11,000 पीड़ित: औसतन, देश में हर साल 11,000 से ज़्यादा लोगों की मौत होती है और इस इंसानी तबाही की वजह से हर दिन लगभग 30 लोगों की मौत होती है। 50% की बड़ी बढ़ोतरी: जहां 2011 में 8,945 मौतें रिपोर्ट हुई थीं, वहीं 2020 तक यह आंकड़ा बढ़कर 13,446 हो गया। अकेले साल 2020 में 2,000 महिलाओं और 1,700 मासूम बच्चों की जान चली गई। सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य: मध्य प्रदेश (2,412), महाराष्ट्र (1,499) और उत्तर प्रदेश (1,347) के बाद गुजरात में जिस तरह से लाइनें बेतरतीब ढंग से बिछाई जा रही हैं, उससे यह डरावने हालात हैं कि राज्य जल्द ही मौत के आंकड़ों में शीर्ष पर पहुंच सकता है।
गुजरात की दयनीय हालत: हर दिन 1 इंसान और सैकड़ों बेगुनाह जानवरों की बलि दी जाती है
गुजरात में बिजली के तारों से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी आंखें खोलने वाला है। हाल ही में खंभालिया में करंट लगने से 2 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जानवरों का नुकसान: अकेले साल 2008-09 में राज्य में 417 लोगों की मौत हुई और 342 लोग गंभीर रूप से जल गए। इनमें से 45 मौतें टूटे तारों की वजह से, 65 लापरवाही की वजह से और 56 मौतें सही देखभाल की कमी की वजह से हुईं। 28 जून, 2025 को सूरत के पिपोदरा रोड पर करंट लगने से 7 मवेशियों की दर्दनाक मौत हो गई। 2016-17 में 249 और उससे पिछले साल 460 मवेशियों की करंट लगने से मौत हुई थी, जबकि 2008-09 में यह आंकड़ा 528 तक पहुंच गया था।
वन्यजीव भी सुरक्षित नहीं: वन विभाग और बिजली कंपनियां चुप
लटकते बिजली के तार जंगली जानवरों के लिए भी खतरे का स्थान साबित हो रहे हैं। 2010 से 2020 तक 10 सालों में 1,300 जंगली जानवरों की करंट लगने से मौत हो चुकी है। पिछले 5 सालों के आंकड़े के मुताबिक, 350 से ज़्यादा हाथी, 180 फ्लेमिंगो, 65 तेंदुए, 20 बाघ, 15 भालू और 10 शेर बिजली के तारों की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं।
नागरिकों के लिए ज़रूरी जानकारी और शिकायत करने का तरीका
अगर आपको अपने इलाके में कोई खुला हुआ 11 केवी तार, मुड़े हुए खंभे या खतरनाक तरीके से लटके हुए तार दिखें, तो बिना देर किए तुरंत तस्वीर लें और अधिकारियों को इस तरह बताएं: शिकायत के लिए सबसे पास की बिजली कंपनी नियंत्रण कक्ष सहायता नंबर: 19124 (यूजीवीसीएल / पीजीवीसीएल / डीजीवीसीएल / एमजीवीसीएल) मुख्य विद्युत निरीक्षक, गांधीनगर को लिखकर या ईमेल से बताएं। बिजली कंपनियों की लापरवाही से हुए हादसों में, पीड़ित परिवार या पशुपालक मुआवज़े का पूरा हक़दार है। यह ज़रूरी है कि व्यवस्था सिर्फ़ कागज़ों पर मानसून-पूर्व का काम दिखाने के बजाय ज़मीन पर मुड़े हुए खंभों और खुले तारों की मरम्मत करे।

