देवभूमि द्वारका।जिले में सिंचाई और पीने के पानी की लगातार बिगड़ती स्थिति तथा बारिश की कमी के चलते किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कई क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी फसल पर संकट मंडरा रहा है। इस बीच किसानों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है।
आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश अध्यक्ष ईसुदान गढ़वी* ने देवभूमि द्वारका जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि किसानों के अधिकार और आर्थिक न्याय की मांग को लेकर वह *29 अगस्त से खंभालिया में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।
बारिश की कमी से फसल पर संकट
द्वारका जिले के विभिन्न इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण जलाशयों में पानी का स्तर लगातार कम हो रहा है। दूसरी ओर, खेतों में खड़ी फसल को भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
किसानों का कहना है कि बुवाई के दौरान बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री पर किया गया खर्च अब संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है। यदि समय पर बारिश या सिंचाई का पानी नहीं मिला तो खड़ी फसल खराब होने की आशंका है।
स्थानीय किसानों की ओर से राहत और जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर कई बार प्रशासन के समक्ष गुहार लगाने का दावा किया गया है। किसानों का आरोप है कि अभी तक उन्हें अपेक्षित राहत पैकेज या सूखाग्रस्त घोषित करने के संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
ईसुदान गढ़वी का सरकार पर सीधा हमला
धरने की घोषणा करते हुए AAP नेता ईसुदान गढ़वी ने सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि द्वारका का किसान पानी के लिए परेशान है और फसल खराब होने के कारण कर्ज के बोझ में दब रहा है। इसके बावजूद सरकार की ओर से पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गढ़वी ने कहा कि किसानों के अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। 29 अगस्त से खंभालिया में धरने पर बैठकर सरकार से द्वारका जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की जाएगी।
आंदोलन के और तेज होने के संकेत
ईसुदान गढ़वी के आंदोलन के ऐलान के बाद देवभूमि द्वारका के स्थानीय राजनीतिक माहौल में हलचल बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि जिले के किसान और विभिन्न किसान संगठन भी इस आंदोलन से जुड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
किसानों की मांग है कि सरकार तत्काल जिले की बारिश और फसल की स्थिति का आकलन कर आवश्यक राहत उपाय घोषित करे।
यदि सरकार की ओर से जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।

