गांधीनगर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की भूमि गुजरात में कागजों पर लागू शराबबंदी के पीछे उगाही, भ्रष्टाचार और अवैध शराब का काला कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है। यदि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन वाकई सतर्क होते, तो एक ही राज्य में बार-बार लट्ठछाप (जहरीली शराब) जैसी गंभीर घटनाएं दर्ज नहीं होतीं। राज्य में पिछले महज 4 वर्षों के भीतर जहरीली शराब से हुई मौतों की 6 छोटी-बड़ी घटनाएं इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि मौजूदा ‘दादा-बेटे’ की सरकार और गृह विभाग का प्रशासनिक ढांचा अंदर से पूरी तरह चरमरा चुका है।
गांधीनगर के वातानुकूलित कमरों से ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे करने वाली सरकार ज़मीन पर शराब माफियाओं के सामने बेबस नज़र आ रही है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी द्वारा अवैध शराब के अड्डों पर बुलडोजर चलाने या कठोर कार्रवाई करने के निर्देश स्थानीय थाना स्तर तक पहुंचते-पहुंचते बेअसर साबित हो रहे हैं। राज्य के कोने-कोने में अवैध शराब बिक्री का यह पूरा तंत्र पुलिस प्रशासन और शराब तस्करों की मिलीभगत से चल रहे ‘हफ्ता राज’ के बल पर टिके होने के आरोप लग रहे हैं।
सरकार और खाकी के सामने खड़े 3 सुलगते सवाल
उगाही और कालेधन की गंगोत्री:* अवैध शराब के अड्डों से हर महीने इकट्ठा होने वाली करोड़ों रुपये की किश्तें बीट जमादार से लेकर किन वरिष्ठ IPS अधिकारियों और राजनेताओं की जेबों तक पहुंचती हैं? क्या इसी कालेधन के लालच में आम नागरिकों की जान दांव पर लगाई जा रही है?
गृह विभाग की ढिलाई और खानापूर्ति:* 4 सालों में 6 बार जहरीली शराब कांड होने के बावजूद किसी भी जिले के पुलिस प्रमुख (SP) या वरिष्ठ IPS अधिकारी पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? हर घटना के बाद केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों को निलंबित करके मामले को रफा-दफा करने का नाटक क्यों रचा जाता है?
कागजी शराबबंदी का कड़वा सच:* क्या राज्य में शराबबंदी कानून केवल गरीब और आम जनता को परेशान करने का जरिया बनकर रह गया है? आखिर किसके राजनीतिक संरक्षण में शराब तस्करों को खुलेआम होम डिलीवरी और अवैध अड्डे चलाने की छूट मिली हुई है?
ठोस प्रशासनिक कार्रवाई के लिए 4 प्रमुख मांगें
ज़मीनी हकीकत उजागर होने के बाद अब कागज़ी बयानों से हटकर तुरंत सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है:
- भ्रष्ट अधिकारियों पर सीधी FIR:* केवल निलंबन की खानापूर्ति बंद की जाए। जिस थाना क्षेत्र में शराब के अवैध अड्डे संचालित हो रहे हैं, वहां के थाना प्रभारी (PI), उप-निरीक्षक (PSI) और एलसीबी (LCB) प्रमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और आपराधिक लापरवाही के तहत FIR दर्ज कर जेल भेजा जाए।
- जिला पुलिस प्रमुख (SP) की जवाबदेही:* जिन जिलों में बार-बार जहरीली शराब की घटनाएं या अवैध अड्डे पाए जाएं, वहां के SP के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए तुरंत पद से हटाया जाए।
- PASA और संपत्ति कुर्का:* अवैध शराब के काले कारोबार में लिप्त माफियाओं पर पासा (PASA) के तहत कार्रवाई हो और उनकी गैर-कानूनी संपत्तियों को तुरंत जब्त किया जाए।
- स्पेशल विजिलेंस रेड:* स्थानीय पुलिस और तस्करों के नापाक गठजोड़ को तोड़ने के लिए स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) को पूरी स्वायत्तता देकर राज्यभर में अवैध भट्टियों को ध्वस्त करने का बुलडोजर अभियान चलाया जाए।
यदि राज्य सरकार अपने नागरिकों को जहरीली शराब के प्रकोप से बचाने और अपने ही विभाग के भ्रष्ट तंत्र पर लगाम लगाने में विफल साबित हो रही है, तो उसे इस प्रशासनिक नाकामी की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अब देखना यह है कि सरकार खोखले आश्वासनों से आगे बढ़कर ज़मीन पर कोई ठोस कार्रवाई करती है या नहीं।

