दिया तले अंधेरा वाली कहावत दिल्ली में सामने आई है। एक तरफ जहां प्रदूषण से निपटने के तमाम दावें किए जा रहे हैं, वहीं अब पता चला है कि दिल्ली सरकार की 12399 गाड़ियों का ही पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं है। एनजीटी ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
हाइलाइट्स
सिर्फ 14,569 गाड़ियों काही वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र है
सॉफ्टवेयर गाड़ियों में नहीं करता है भेदभाव- ट्रांसपोर्ट विभाग
नई दिल्ली: राजधानी में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए NGT ने सरकारी और सरकारी काम में लगी किराये की गाड़ियों में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र ( PUC ) की अनदेखी पर सख्त रुख अपनाया है। NGT ने निर्देश दिए हैं कि बिना वैध PUC वाली सरकारी गाड़ियों पर भी सख्त कार्रवाई हो। NGT ने जितेंद्र महाजन की दायर याचिका पर सुनवाई की।
ट्रांसपोर्ट विभाग ने बताया कि कैमरे या सॉफ्टवेयर प्राइवेट और सरकारी गाड़ियों में कोई भेदभाव नहीं करते। दिल्ली सरकार की 12,399 गाड़ियों का PUC नहीं है। सिर्फ 14,569 गाड़ियों का ही वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र है, जबकि 4027 गाड़ियों का PUC डेटा नहीं है।
1360 गाड़ियों का चालान हुआ
सरकार की 4027 गाड़ियों का पीयूसी डेटा उपलब्ध ही नहीं है
बिना PUC वाले वाहनों का सिस्टम से ऑटोमैटिक हो रहा चालान
कैमरे में दिखते ही हो जाता है खुद चालान
ट्रांसपोर्ट विभाग ने NGT को बताया कि बिना पीयूसी वाले वाहनों के लिए सिस्टम लॉक लगा है। कैमरे के सामने ऐसे वाहन के आते ही चालान खुद से ही जनरेट हो जाता है। NGT ने आदेश दिया कि नियमों का जमीनी स्तर पर पालन हो और बिना वैध प्रमाण पत्र के कोई भी सरकारी वाहन सड़क पर न उतर सके। इसी के साथ ही बेंच ने मामले का निपटारा कर दिया।

