पश्चिमी दिल्ली के मादीपुर और ज्वालापुरी में पिछले पांच वर्षों से अटके दो सरकारी अस्पतालों के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 426.53 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट को मंजूरी दी है।
नई दिल्लीः पांच साल से निर्माणाधीन पड़े दो अस्पतालों के अधूरे काम को पूरा करने का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मादीपुर और ज्वालापुरी में बन रहे दोनों अस्पतालों के बचे हुए काम को पूरा करने के लिए 426.53 करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है। दोनों अस्पतालों के बनने से कुल 1382 नए बेड बढ़ेंगे। इससे नांगलोई, पश्चिमी दिल्ली, मादीपुर, ज्वालापुरी के आसपास रहने वाली 20 लाख आबादी वाले क्षेत्रों को फायदा होगा।
मादीपुर और ज्वालापुरी अस्पताल में 65 फीसदी काम पूरा
मादीपुर और ज्वालापुरी अस्पताल का अभी तक 65 फीसदी काम पूरा हुआ है। दोनों ही 691-691 बैंड के अस्पताल बनाए जाने हैं। साल 2019 में दोनों अस्पतालों के निर्माण को मंजूरी दी गई थी। 2022 में इनके डिजाइन में बदलाव के साथ दो अतिरिक्त मंजिल के निर्माण के चलते यह काम अटक गया। अब इसकी लागत में इजाफा हुआ है।
मादीपुर अस्पताल के लिए इतने पैसे की और जरूरत
मादीपुर अस्पताल को बनाने की शुरुआती लागत 320 करोड़ रुपये आंकी गई थी। आधे से अधिक बजट खर्च हो चुका है, लेकिन अभी तक 65 फीसदी फिजिकल वर्क पूरा हुआ है। अब इसके बचे हुए काम को पूरा करने के लिए 203 करोड़ रुपये की जरूरत है। यानी अब कुल लागत 466.50 करोड़ रुपये हो गई है।
ज्वालापुरी अस्पताल में भी पैसे को और जरूरत
इसी तरह ज्वालापुरी अस्पताल की भी शुरुआती लागत 319.65 करोड़ रुपये थी। अब इसकी लागत बढ़कर 484.04 करोड़ रुपये हो गई है। अब तक 260.51 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। अब बचे हुए काम को पूरा करने के लिए 223.53 करोड़ रुपये और लगेंगे। अब दोनों अस्पतालों के अधूरे काम को पूरा करने में दो साल और लगेंगे। 6 महीने प्लानिंग करने और 18 महीने उसे लागू करने में लगेंगे।

