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फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने वाले लोगों का एक बार फिर हो सकता है मेडिकल बोर्ड से सत्यापन सर्टिफिकेट संदिग्ध होने पर एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है

हेमंत वर्मा विशेष खोज पड़ताल राजनांदगांव छत्तीसगढ़ : फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी कर रहे लोगों को पिछले वर्ष हाईकोर्ट की चेतावनी के बाद 20 अगस्त तक हर हाल में मेडिकल बोर्ड से जांच एवं सर्टिफिकेट लेने के आदेश राज्य शासन को दिए गए थे इसके बावजूद भी राज्य शासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया अपवाद स्वरूप बिलासपुर जिला में दर्जनों दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे कार्यरत सरकारी कर्मचारियों पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई इसी तरीके से हाल ही में धमतरी जिले में फर्जी शिक्षा कर्मी जो कि फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे थे कई लोग प्रधान पाठक भी बन चुके थे उन्हें बर्खास्त किया गया है लेकिन इस मामले में राजनांदगांव जिला सर्वाधिक चर्चित रहा है उसमें से डोंगरगांव विकासखंड में फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने वाले सैकड़ो लोग अभी भी मजे से नौकरी कर रहे हैं मामला 2008 9 का है तत्कालीन बीईओ के द्वारा फर्जी तरीके से दर्जनों लोगों को फर्जी तरीके से अंधे लंगड़े लूले के नाम से नौकरी लगाई गई थी जो अभी भी मजे से सरकार की आंखों में धुल झोंक रहे हैं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने बुधवार को महानदी भवन मंत्रालय में एक संयुक्त बैठक ली इस बैठक में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट प्रकरणों के त्वरित जांच को लेकर चर्चा हुई

बैठक में दिव्यांग सर्टिफिकेट चर्चा का केंद्र बिंदु रहा सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिव्यांग सर्टिफिकेट प्रमाण पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत 186 व्यक्तियों से संबंधित प्रकरणों की जांच राज्य मेडिकल बोर्ड एवं संभागिय मेडिकल बोर्ड से जांच करने की बात की गई सवाल बेहद गंभीर है क्या पूरे प्रदेश भर में सिर्फ 186 शासकीय सेवक ही इसके दायरे में है विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में हजारों लोग अभी भी मजे से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे हैं और असल लोगों का हक मार रहे हैं लेकिन शासन प्रशासन क्यों इस पर एक्शन नहीं ले पा रही है यह सोचने वाली बात है दरअसल यहां पर पेंच न्यायपालिका के बीच फंस जाता है दरअसल किसी भी शासकीय कर्मचारी की फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने की शिकायत के बाद जांच होती है कार्रवाई होती है सस्पेंड भी की जाती है लेकिन सस्पेंड होने वाला व्यक्ति सीधे हाई कोर्ट चले जाता है और वहां से स्टे ले आता है फिर वही लंबी चलने वाली प्रक्रिया पुनः बहाली फिर वही ढाक के तीन पांत यानी कि यह क्रम चलते रहता है फिलहाल इसका कोई तोड़ नजर नहीं आ रहा है लेकिन एक बार छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री और महिला बाल विकास मंत्री के संयुक्त बैठक ने दिव्यांग प्रमाण पत्र के सारे नौकरी कर रहे लोगों की धड़कन को पुनः बढ़ा दिया है हेमंत वर्मा की कलम से

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