अहमदाबाद प्लेन क्रैश को एक साल से ज़्यादा समय बीत जाने के बावजूद, भारत की केंद्र सरकार और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने अभी तक इस दुखद हादसे की फाइनल और ऑफिशियल रिपोर्ट जारी नहीं की है। एक तरफ, इतने बड़े हादसे की फाइनल रिपोर्ट रोकी गई है, वहीं दूसरी तरफ, इस पूरे मामले में कई गंभीर शक और विवाद खड़े हो गए हैं। देशवासी और पीड़ितों के परिवार वाले लगातार एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि जांच की फाइनल रिपोर्ट जारी करने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
ग्राउंड रिपोर्ट और विवाद की शुरुआत
यह पूरा विवाद फरवरी 2026 में शुरू हुआ, जब देश के बड़े अखबारों और न्यूज़ चैनलों के पहले पन्नों पर बिना किसी संतोषजनक सबूत के एक रिपोर्ट चलाई गई। इन रिपोर्ट्स में चौंकाने वाला दावा किया गया कि फ्लाइट कैप्टन सुमित सभरवाल ने खुद मेन फ्यूल स्विच बंद कर दिया था, जिससे एयरक्राफ्ट की फ्यूल सप्लाई अचानक रुक गई और यह भयानक हादसा हुआ। जैसे ही यह रिपोर्ट सामने आई, पूरे देश में गुस्से का माहौल बन गया। एक तरफ आम नागरिक इस पर यकीन करने को तैयार नहीं थे, वहीं दूसरी तरफ पायलट एसोसिएशन ने भी इस लीक हुई शुरुआती रिपोर्ट का कड़ा विरोध करते हुए इसे पूरी तरह से झूठा और एकतरफ़ा बताया। पायलट एसोसिएशन ने साफ़ किया कि कोई भी ज़िम्मेदार कैप्टन इतनी गंभीर गलती या काम नहीं कर सकता और ऐसी रिपोर्टें दिवंगत पायलट की इमेज को नुकसान पहुँचाने की कोशिश हैं।
अमेरिकी फर्म का टेक्निकल खुलासा और सिम्युलेटर डेटा
इस विवाद के बीच, पूरे घटनाक्रम में एक नया और बहुत अहम मोड़ तब आया जब प्लेन क्रैश के पीड़ितों के परिवारों का केस लड़ने वाली मशहूर अमेरिकी लीगल फर्म बिस्ले एलन ने इस मामले में एक बड़ा खुलासा किया। इस फर्म ने कैप्टन सुमित सभरवाल की गलती की थ्योरी को बेबुनियाद बताया है।
बिस्ले एलन द्वारा जारी किए गए सिम्युलेटर वीडियो और टेक्निकल डेटा एनालिसिस के मुताबिक, प्लेन में फ्यूल सप्लाई में रुकावट आने से पहले ही फ्लाइट में गंभीर टेक्निकल और इलेक्ट्रिकल खराबी शुरू हो गई थी। यह टेक्निकल डेटा साफ़ तौर पर इस बात की ओर इशारा करता है कि प्लेन में अंदरूनी मैकेनिकल गड़बड़ियां हादसे के लिए ज़िम्मेदार थीं, न कि पायलट का कोई फ़ैसला। इस खुलासे के बाद, कैप्टन सुमित सभरवाल पर लगे आरोपों पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।
जांच एजेंसियों और मीडिया की भूमिका घेरे में
इन सभी डिटेल्स के सामने आने के बाद, अब कुछ कड़वे और सीधे सवाल उठ रहे हैं। कैप्टन सुमित सभरवाल की खबर को ब्रेकिंग न्यूज़ बनाकर फ़ाइनल और ऑफ़िशियल जांच रिपोर्ट आने से पहले ही अख़बारों और न्यूज़ चैनलों पर दिखाने के पीछे कौन था? क्या ऑफ़िशियल जांच पूरी होने से पहले ही लोगों का ध्यान किसी खास तरफ़ खींचकर बड़ी टेक्निकल कमियों को छिपाने की कोशिश की गई थी?
भारतीय जांच एजेंसी AAIB की शुरुआती जांच और उसके देरी से किए गए काम से नाखुश, पीड़ित परिवारों को इंसाफ़ पाने के लिए एक इंटरनेशनल लेवल की लीगल फ़र्म की मदद लेनी पड़ी है। जांच की इस धीमी रफ़्तार और लीक हुई रिपोर्टों के बैकग्राउंड में, अब यह देखना ज़रूरी होगा कि केंद्र सरकार और जांच एजेंसियां फ़ाइनल और निष्पक्ष रिपोर्ट कब जारी करती हैं। देश के लोग और जिन पीड़ित परिवारों ने अपने रिश्तेदारों को खो दिया है, वे अब उम्मीद कर रहे हैं कि इस भयानक हादसे की असली वजह सामने आएगी और सच्चाई हमेशा के लिए रहस्य नहीं रहेगी।

