पहले शिकायतों के बाद प्रशासन ने बंद कराए थे झूले, अब दोबारा संचालन शुरू होने से उठे सवाल; सुरक्षा प्रमाणपत्र, अग्निशमन अनापत्ति और सरकारी मंजूरी को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग
अंबाजी। प्रसिद्ध तीर्थस्थल अंबाजी में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ दिन पहले स्थानीय लोगों और दर्शनार्थियों की शिकायतों के बाद प्रशासन ने जिन चगडोल (बड़े झूलों) और जोखिम भरी मनोरंजन राइड्स को बंद कराया था, वे अब एक बार फिर संचालित होने लगी हैं। अचानक दोबारा शुरू हुए इन झूलों को लेकर क्षेत्र में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का सवाल है कि जब इन राइड्स को सुरक्षा संबंधी शिकायतों के बाद बंद कराया गया था, तो अब इन्हें दोबारा चलाने की अनुमति किस आधार पर दी गई? क्या प्रशासन ने आवश्यक जांच के बाद मंजूरी दी है या फिर नियमों की अनदेखी की जा रही है?
सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार, किसी भी मेले या मनोरंजन राइड्स के संचालन से पहले आवश्यक सरकारी अनुमतियां और सुरक्षा प्रमाणपत्र होना जरूरी है। इनमें अग्निशमन सुरक्षा की अनापत्ति, राइड्स की संरचनात्मक मजबूती का प्रमाणपत्र, तकनीकी फिटनेस जांच, यात्रियों का बीमा और सक्षम प्रशासनिक अधिकारी की अनुमति प्रमुख हैं। ऐसे में अंबाजी में दोबारा शुरू हुई राइड्स के पास सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं, यह स्पष्ट होना चाहिए।
लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि किसी राइड में तकनीकी खराबी आती है या कोई दुर्घटना होती है तो आपातकालीन बचाव और अग्निशमन की क्या व्यवस्था है? हजारों श्रद्धालु अपने परिवार और बच्चों के साथ अंबाजी पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
राजकोट और वडोदरा की घटनाओं से भी नहीं लिया सबक?
गुजरात में राजकोट गेम जोन अग्निकांड और वडोदरा के हरनी झील हादसे जैसी दर्दनाक घटनाएं पहले ही सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के गंभीर परिणाम दिखा चुकी हैं। इन हादसों के बाद भी यदि मनोरंजन स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो यह चिंता का विषय है। अंबाजी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल पर रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे में किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में नाराजगी
शिकायतों के बाद बंद कराई गई राइड्स का दोबारा संचालन शुरू होने से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि प्रशासन ने पहले शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की थी, लेकिन अब उन्हीं राइड्स का फिर से चलना प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है। लोगों का आरोप है कि यदि सभी सुरक्षा मानक पूरे नहीं हैं तो राइड्स का संचालन किसी भी स्थिति में नहीं होना चाहिए।
प्रशासन से जवाब और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि दोबारा शुरू हुई सभी राइड्स की तकनीकी जांच कराई जाए। इनके पास उपलब्ध सरकारी अनुमतियों, संरचनात्मक मजबूती के प्रमाणपत्र, अग्निशमन सुरक्षा और बीमा संबंधी दस्तावेजों की जांच सार्वजनिक की जाए। यदि किसी राइड का संचालन बिना वैध अनुमति के हो रहा है तो संबंधित संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर राइड्स को तत्काल बंद कराया जाए।
लोगों ने यह भी मांग की है कि यदि सभी अनुमतियां वैध हैं तो प्रशासन इसकी आधिकारिक जानकारी दे, ताकि श्रद्धालुओं के बीच बनी आशंकाएं दूर हो सकें। अब देखना यह है कि प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समय रहते कार्रवाई करता है या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

