महानगर मेट्रो ब्यूरो : देशभर के जैन संघ / मध्य प्रदेश: अहिंसा, संयम, परम पवित्रता और त्याग की मिसाल पेश करने वाले भगवान महावीर स्वामी के महान सिद्धांतों को आज कुछ ढोंगी और चरित्रहीन पात्रों ने अपनी पाशविक लालसाओं को पूरा करने का जरिया बना लिया है। आस्था और धर्म के नाम पर पर्दे के पीछे जो खेल खेले जा रहे हैं, उन्होंने मानवता को शर्मसार कर दिया है। जैन समाज से एक ऐसा सनसनीखेज और कलेजा कंपा देने वाला मामला सामने आया है, जिसने संत समाज की गरिमा को तार-तार कर दिया है। साधु के पवित्र भेष की आड़ में अपनी हवस का शिकार बनाने वाले ‘सागरचंद्र सागर’ नामक इस कुसाधु के अनैतिक रिश्तों, काले कारनामों और भ्रष्टाचार के दस्तावेज अब पूरी तरह से उजागर हो चुके हैं!
भेष की पवित्रता का सौदा: अनगिनत जिंदगियों को अंधेरे में धकेलने का घृणित खेल
संत या साधु का जीवन भौतिक सुखों से परे और पूर्णतः पवित्र माना जाता है। परंतु सागरचंद्र सागर ने भगवा वस्त्रों की ओट में रहकर कई भोली-भाली महिलाओं और साध्वियों के साथ अनैतिक संबंध स्थापित किए होने के बेहद गंभीर और विस्फोटक आरोप झेले हैं। धर्म के प्रभाव और आम जन की अटूट श्रद्धा का दुरुपयोग कर इस शख्स ने कई परिवारों और युवतियों का भविष्य बर्बाद कर दिया है। इतने संगीन आरोप लगने के बावजूद यह तथाकथित साधु आज तक मीडिया या जनता के सामने आकर अपनी सफाई देने की हिम्मत नहीं जुटा सका है, जो इसकी अपराधी मानसिकता और अंदर की चोर-मनोवृत्ति को साफ उजागर करता है।
वायरल चैट्स और रिकॉर्डिंग का सच: “अगर सब झूठ था, तो सफाई देने की नौबत क्यों आई?”
यह पूरा घिनौना सच तब खुलकर सामने आया जब इस कुसाधु की अपनी एक महिला मित्र के साथ कथित कॉल रिकॉर्डिंग, आपत्तिजनक तस्वीरें और व्हाट्सएप चैट्स के पुख्ता सबूत सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गए। सबसे बड़ा और चुभने वाला सवाल यह है कि यदि वे तमाम फोटो और बातें निराधार थीं, तो उस महिला के साथ इस कुसाधु को फोन पर लंबी बातचीत करने की आवश्यकता ही क्यों पड़ी? “मेरे निजी फोटो कैसे लीक हो गए?” यह सफाई देने वाले खुद इस शख्स के अपने शब्द इस बात की गवाही दे रहे हैं कि दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है! इस स्तर की अशुद्ध और गंदी करतूतें सामने आने के बाद भी इसका मुखौटा उतर चुका है, मगर इसके चेहरे पर जरा भी शर्म या हया का नामोनिशान नहीं बचा है।
भ्रष्ट ट्रस्टियों की साठगांठ और दान के धन से अय्याशी का साम्राज्य
इस तरह के कलंकित और पतित पात्रों को बचाने, छिपाने और उन्हें शह देने का घिनौना काम कुछ स्वार्थी तत्व कर रहे हैं। सागर समुदाय से जुड़े कुछेक विशेष संघों और जिनालयों के भ्रष्ट पदाधिकारी इस पूरे पाखंड में सीधे तौर पर लिप्त हैं:
तीर्थस्थलों और देवालयों में श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धावश दिए जाने वाले दान और चढ़ावे के करोड़ों रुपयों का गोलमाल करके इन ट्रस्टियों और सागरचंद्र सागर के बीच बंदरबांट की जाती है।
दान-पुण्य के इन पवित्र पैसों के दम पर इस कुसाधु ने विलासिता, ऐशो-આરામ और मौजमस्ती से भरी हाइवोल्टेज जिंदगी खड़ी की है।
धर्म की आड़ में जनता को मूर्ख बनाकर बेनामी संपत्तियों और अकूत माया का जाल बुना गया है।
इस पूरे काले कारोबार पर पर्दा डालने के लिए मीडिया कोऑर्डिनेटर ‘अभय चोपड़ा’ और उनके जैसे कुछ दलाल किस्म के स्वार्थी लोग सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जो चंद पैसों की खातिर इस कुसाधु के महापापों को छिपाने के षड्यंत्र रच रहे हैं।
भगवान महावीर की वाणी का अपमान: मंदसौर में चल रहे प्रवचनों का हो संपूर्ण बहिष्कार!
वर्तमान में यह कुसाधु मध्य प्रदेश کے मंदसौर क्षेत्र में अपने पाखंड भरे प्रवचन चला रहा है। जिस पावन मंच से सत्य, अहिंसा और सदाचार के पाठ पढ़ाए जाने चाहिए, वहां बैठकर यह व्यक्ति सामने बैठी भोली-भाली महिलाओं और श्रद्धालुओं को किस विकृत मानसिकता से देखता होगा, इस विचार मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते हैं! जिस वक्ता का खुद का चरित्र दागदार और मलीन हो, वह समाज को क्या सही राह दिखा सकता है?
समस्त जैन समाज और धर्म के प्रति निष्ठा रखने वाले हर एक व्यक्ति के लिए यह गहरी आत्मसमिक्षा और चेतावनी का पल है। जो शख्स संत परंपरा को कलंकित कर रहा है, उसे संरक्षण देने वाले हर एक चेहरे को बेनकाब करना अब समय की सबसे बड़ी मांग है।
जैन समाज की खुली हुंकार: अब खामोश रहने का दौर खत्म!
‘महानगर मेट्रो’ के मंच से समस्त जैन समाज, युवा वाहिनी और धर्मप्रेमियों के नाम एक कड़ा और सीधा संदेश है:
१. कड़ा बहिष्कार: जहां कहीं भी इस कुसाधु सागरचंद्र सागर के शिविर या प्रवचन आयोजित हों, वहां उसका पुरजोर विरोध करें और उसका पूर्ण बहिष्कार करें।
२. दान पर पूर्ण प्रतिबंध: ऐसे पाखंडियों और इनका समर्थन करने वाले संगठनों को एक भी रुपया दान या आर्थिक मदद के रूप में न दिया जाए।
३. भेष त्यागने का अल्टीमेटम: इस कुसाधु को तत्काल प्रभाव से साधु का पवित्र पहनावा उतार फेंकना चाहिए और एक आम इंसान की तरह जीवन बिताना चाहिए, क्योंकि इसे ‘संत’ कहना सच्चे संतों का अपमान है।
४. दलालों का सामाजिक बहिष्कार: जो ट्रस्टी या मीडिया मैनेजर्स (जैसे अभय चोपड़ा जैसे लोग) इस कुसाधु को बचाने के कुचक्र में शामिल हैं, उन्हें भी समाज से पूरी तरह दरकिनार किया जाए।
यदि हम अब भी आंखें मूंदकर चुपचाप बैठे रहे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। भगवान महावीर के निर्मल और पवित्र मार्ग को इस कलंक से मुक्त कराने के लिए अब हर जागरूक जैन को सड़क पर उतरकर इन पाखंडियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करनी ही होगी!
जैन जगत की एकता रंग लाई: प्रवचनों में ५० लोग भी नहीं बचे, कुसाधु के उड़े होश!
मंदसौर और उसके आसपास के क्षेत्रों में जैन समाज अब पूरी तरह लामबंद हो चुका है। इस कुसाधु के पाखंड के खिलाफ ऐसा जनआक्रोश भड़का है कि इसके प्रवचन हॉल में आज बमुश्किल ५० लोग भी उपस्थित नहीं रह पा रहे हैं! जैन समाज को अपनी एकजुट ताकत दिखाने का यह ऐतिहासिक अवसर मिला है। इस आंदोलन को और तेज करें, इस कलंक को समाज की दहलीज से बाहर खदेड़ें और हमारी पवित्र साध्वियों तथा बेटियों के सम्मान की रक्षा करें!

