महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों के नतीजों ने सत्ताधारी महायुति के भीतर सीट बंटवारे, उम्मीदवारों के समर्थन और आपसी तालमेल को लेकर मतभेद उजागर कर दिए हैं। बीजेपी ने शिंदे की सेना पर सवाल उठाए हैं।
मुंबई: महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनावों के नतीजों के बाद महायुति गठबंधन के भीतर दरार खुलकर सामने आने लगी है। बीजेपी ने सहयोगी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर अहम सीटों पर हार के लिए जिम्मेदार ठहराया है। बीजेपी ने शिंदे सेना पर भीतरघात और तालमेल की कमी का आरोप लगाया है। बीजेपी का दावा है कि बागी उम्मीदवारों और एक निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देने से वोटों का बंटवारा हुआ। इसका नुकसान पार्टी को पुणे स्नातक और नागपुर सीटों पर उठाना पड़ा। नागपुर ग्रेजुएट्स सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत वंजारी जीते हैं। उन्होंने बीजेपी के कैंडिडेट सुधाकर कोहले को हराया है।वहीं, पुणे में शरद पवार की एनसीपी ने 10000 वोटों से जीत दर्ज की और महा विकास अघाड़ी ने पांच में से तीन सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की। बीजेपी ने संभाजी नगर में सहयोगियों के खिलाफ प्रचार किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
बीजेपी ने लगाए भीतरघात का आरोप
पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का नतीजा बीजेपी और शिवसेना के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह बन गया है। बीजेपी के कौस्तुभ गावड़े की जीत के बावजूद सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं। शिवसेना सीटों के बंटवारे के फॉर्मूले से नाखुश थी और उसने निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप का समर्थन किया था। बीजेपी इस बात से नाराज है कि शिवसेना ने सानप को जिताने के लिए पूरी ताकत लगाई। पार्टी का आरोप है कि गठबंधन के भीतर इस तरह की गतिविधियों से सहयोगियों के वोट बंटते हैं और चुनावी नुकसान उठाना पड़ता है। बीजेपी ने गठबंधन धर्म के पालन पर सवाल उठाते हुए भीतरघात का आरोप भी लगाया है।
पुणे में BJP को झटका, एनसीपी-एसपी ने 10 हजार वोटों से दर्ज की जीत
पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी उम्मीदवार स्मिता जाधव को एनसीपी (शरद पवार) की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख जाधव ने हरा दिया। पुणे में शरद पवार की एनसीपी ने 10000 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। इसे BJP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में एनसीपी-एसपी के प्रतापसिंह पाटिल ने एनसीपी के उम्मीदवार सतीश चव्हाण को हराया।

