अहमदाबाद। यहां के विश्वेश्वरैया सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज (वीजीईसी) में आज एक शर्मनाक घटना सामने आई है, जिससे पढ़ाई और अनुशासन की चिंता बढ़ गई है। कॉलेज वहीवटदार ने अचानक छात्रों के मध्य-सत्र परीक्षा का तय समय बदल दिया। सुबह की जगह शाम 5:00 बजे से 6:30 बजे तक परीक्षा रखी गई। कोई बड़ी शैक्षणिक या तकनीकी समस्या नहीं थी, लेकिन असली वजह जानकर गुस्सा आ सकता है। साहेब का जन्मदिन है और शाम को दीये जलाने और फोटो खिंचवाने की गुटबाजी है। जहां फोटो खिंचाना और नेताओं की चापलूसी छात्रों के करियर और भविष्य से ज़्यादा ज़रूरी हो गई है, वाह रे हमारा शिक्षा तंत्र! सुबह के सत्र की परीक्षाएं सिर्फ इसलिए बदली जा रही हैं ताकि छात्रों को शाम 7:00 बजे कॉलेज में बिठाकर तारीफ़ के कार्यक्रम के लिए बलि का बकरा बनाया जा सके। क्या सरकारी कॉलेज अब ज्ञान के मंदिर बन गए हैं या किसी नेता के प्रचार का अड्डा?
वहीवटदार के सामने ये ज्वलंत सवाल उठ रहे हैं: क्या अब उपाधि या इंजीनियरिंग की उपाधि पढ़ाई करके नहीं, बल्कि किसी नेता की आरती उतारकर मिलेगी? एक पार्टी के नेता के फोटो खिंचाने के लिए सैकड़ों छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य से छेड़छाड़ करने का हक किसने दिया? जब वहीवटदार शिक्षा के मंदिर जैसी पवित्र जगह को राजनीतिक गुलामी का मंच बनाता है, तो उसके पेट में मरोड़ क्यों नहीं उठती? ऐसे बेवकूफी भरे आदेश देने वाले अधिकारी छात्रों के गुस्से और बुरे भविष्य से क्यों नहीं डरते? दूर-दराज से आने वाले छात्रवास के छात्रों और आने-जाने में दिक्कत झेल रहे युवाओं के लिए आखिरी समय में परीक्षा का समय बदलना कहां का इंसाफ है? शिक्षा को ऐसे सस्ते राजनीतिक तमाशों से पूरी तरह मुक्त रखना चाहिए। यह साफ और मजबूत मांग है कि आज की परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद छात्रों को छुट्टी दी जाए, ताकि वे ऐसे फालतू के झगड़ों में फंसे बिना घर जा सकें। अगर छात्रों के शैक्षणिक हितों को इसी तरह कुचला जाता रहा, तो आने वाले दिनों में इतना ज़बरदस्त विरोध होगा जिसकी इन चापलूसों ने कल्पना भी नहीं की होगी! उपाधि इंजीनियर के लिए होती है, किसी नेता की पूजा के लिए नहीं। युवा अब शिक्षा की कीमत पर इन राजनीतिक समूहों को बर्दाश्त नहीं करेंगे!

