फसल नुकसान के मुआवजे और सिंचाई के लिए बिजली को लेकर आम आदमी पार्टी का सरकार पर निशाना, किसानों की समस्याओं पर उठाए तीखे सवाल
द्वारका। देवभूमि द्वारका की पवित्र धरती से आम आदमी पार्टी की प्रदेश नेता जिगीषा पटेल ने गुजरात की भाजपा सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए किसानों की समस्याओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने किसानों की खराब होती स्थिति, फसल नुकसान के मुआवजे और सिंचाई के लिए बिजली की समस्या को लेकर सरकार की नीतियों और नीयत पर सवाल खड़े किए।
द्वारका में आयोजित पत्रकार वार्ता और जनसभा के दौरान जिगीषा पटेल ने आरोप लगाते हुए कहा कि *“अन्य दलों के विधायकों और नेताओं को खरीदने के लिए सरकार के पास करोड़ों रुपये का बजट है, लेकिन कड़ी मेहनत करके देश का पेट भरने वाले किसानों को उनका हक देने के लिए खजाना खाली हो जाता है।”
किसान परेशान, सरकार अपने प्रचार में व्यस्त: जिगीषा पटेल
जिगीषा पटेल ने कहा कि द्वारका सहित पूरे गुजरात का किसान प्राकृतिक आपदाओं और सरकार की कथित अन्यायपूर्ण नीतियों के बीच परेशान है। कभी अतिवृष्टि तो कभी बेमौसम बारिश के कारण किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि फसल खराब होने के बाद सर्वे के नाम पर कागजी कार्रवाई तो होती है, लेकिन किसानों को मिलने वाला मुआवजा उनकी वास्तविक क्षति के मुकाबले बेहद कम होता है। उनके अनुसार, किसानों को पर्याप्त सहायता नहीं मिलने से उनकी आर्थिक परेशानी लगातार बढ़ रही है।
‘नेता खरीदने’ के मॉडल का लगाया आरोप
आप नेता ने सरकार पर सत्ता बनाए रखने और विपक्षी नेताओं को अपने पक्ष में करने के लिए जनता के कर के पैसों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक गतिविधियों के लिए करोड़ों रुपये उपलब्ध हैं, तो किसानों की कर्जमाफी, फसल नुकसान का उचित मुआवजा और उनकी उपज के उचित मूल्य की बात आने पर सरकार पीछे क्यों हट जाती है?
बिजली-पानी की समस्या को लेकर भी सरकार पर निशाना
जिगीषा पटेल ने सिंचाई के लिए बिजली की समस्या का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को घंटों बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उन्हें रात के अंधेरे में खेतों में जाकर सिंचाई करनी पड़ती है।
उनका कहना है कि किसान पहले ही मौसम और आर्थिक संकट से जूझ रहा है और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्या उसकी परेशानी को और बढ़ा रही है।
“जनता के कर का पैसा आखिर किसके लिए?”
आम आदमी पार्टी ने सरकार के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। पार्टी की ओर से पूछा गया कि क्या गुजरात के किसान केवल चुनाव के समय वोट बैंक के रूप में ही महत्वपूर्ण होते हैं? यदि दूसरे दलों के नेताओं को अपने पक्ष में लाने के लिए करोड़ों रुपये उपलब्ध हैं, तो प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को पर्याप्त मुआवजा देने में सरकार पीछे क्यों हटती है?
पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि ‘किसान समृद्ध तो देश समृद्ध’ जैसे नारे देने वाली सरकार के कार्यकाल में किसान कर्ज और आर्थिक संकट से क्यों जूझ रहे हैं।
न्याय नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी
आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि द्वारका सहित पूरे गुजरात के किसानों को तत्काल उचित न्याय और फसल नुकसान का पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को तेज किया जाएगा।
पार्टी ने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर जरूरत पड़ने पर गांधीनगर तक उग्र आंदोलन किया जाएगा। अब देखना होगा कि किसानों की समस्याओं और आप नेता द्वारा उठाए गए सवालों पर गुजरात सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

