मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में सेवाभारती आश्रम के हॉस्टल में प्रसादी पेड़ा खाने से 15 आदिवासी छात्राएं बीमार हो गईं। दस्त, बुखार और सिरदर्द की शिकायत के बाद सभी को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से हॉस्टल में रहने वाली बेटियों की सेहत के साथ खिलवाड़ का चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां सेवाभारती आश्रम द्वारा संचालित एक हॉस्टल में रहने वाली 15 आदिवासी छात्राएं सोमवार को अचानक बीमार पड़ गईं। रविवार शाम को आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम से लाए गए प्रसादी पेड़े का सेवन करने के बाद इन बच्चियों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजनों और आश्रम प्रबंधन में हड़कंप मच गया।
उल्टी-दस्त, बुखार और सिरदर्द से बेहाल हुईं बेटियां
घटना के बाद आनन-फानन में सभी 15 छात्राओं को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्तीकराया गया। इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि बीमार बच्चियों में से आठ छात्राएं डायरिया से पीड़ित हैं, जबकि सात अन्य छात्राओं ने तेज बुखार और सिरदर्द की शिकायत की है। गनीमत यह रही कि समय पर मेडिकल हेल्प मिलने से सभी बच्चियों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम लगातार उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखे हुए है।
पहले बिस्किट पर मढ़ा दोष, फिर छात्राओं के खुलासे पर खुली पोल
इस पूरे मामले में हॉस्टल अधीक्षिका का रवैया भी सवालों के घेरे में आ गया। शुरुआत में हॉस्टल अधीक्षिका ने बीमारी का कारण छात्राओं द्वारा खाए गए पार्ले बिस्किट को बताने की कोशिश की। हालांकि, जब अस्पताल में भर्ती बच्चियों ने डॉक्टरों को साफ-साफ बताया कि उन्होंने प्रसादी में मिला पेड़ा खाया था, तब जाकर अधीक्षिका ने स्वीकार किया कि रविवार शाम को पवार मंगल भवन में आयोजित गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम से लाए गए पेड़े को प्रसादी के रूप में बांटा गया था।
खाने के सैंपल की होगी जांच, डॉक्टर बोले- हालत खतरे से बाहर
रविवार रात के भोजन में छात्राओं को दाल, चावल और कद्दू की सब्जी भी परोसी गई थी। बीमारी का असली कारण पेड़ा है या भोजन का कोई अन्य सामान, इसकी पुष्टि के लिए खाद्य विभाग की टीम भोजन और पेड़े के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजेगी। राहत की बात यह है कि अस्पताल में भर्ती कोई भी छात्रा गंभीर हालत में नहीं है और सभी बच्चियां दवाओं का बेहतर रिस्पॉन्स दे रही हैं।
खाने के सैंपल की होगी जांच, डॉक्टर बोले- हालत खतरे से बाहर
रविवार रात के भोजन में छात्राओं को दाल, चावल और कद्दू की सब्जी भी परोसी गई थी। बीमारी का असली कारण पेड़ा है या भोजन का कोई अन्य सामान, इसकी पुष्टि के लिए खाद्य विभाग की टीम भोजन और पेड़े के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजेगी। राहत की बात यह है कि अस्पताल में भर्ती कोई भी छात्रा गंभीर हालत में नहीं है और सभी बच्चियां दवाओं का बेहतर रिस्पॉन्स दे रही हैं।

