पचमढ़ी छुट्टी मनाने जा रहे बेगमगंज के सरकारी डॉक्टरों की टीम ने रायसेन में सड़क हादसे के शिकार एक गंभीर घायल युवक को मौके पर ही सीपीआर (CPR) देकर उसकी रुकी हुई सांसें वापस लौटा दीं और जान बचाई।
रायसेन: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से डॉक्टरों के देवदूत बनने की एक बेहद भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। बेगमगंज सिविल अस्पताल के सरकारी डॉक्टरों की एक टीम शुक्रवार शाम दो दिन की छुट्टी मनाने के लिए पचमढ़ी जा रही थी।
तभी भोपाल-जबलपुर हाईवे पर बरेली कस्बे से करीब 5 किलोमीटर दूर दो तेज रफ्तार बाइकों की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। इस भीषण हादसे में बानियाखेड़ी गांव के रहने वाले नरेंद्र नामक युवक को गंभीर चोटें आईं और कुछ ही पलों में उसकी सांसें चलना बंद हो गईं।
मौके पर ही दिया सीपीआर, लौट आईं सांसें
उसी वक्त वहां से गुजर रहे बेगमगंज के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. नितिन तोमर, डॉ. अमन सेन, डॉ. अभिषेक साहू और डॉ. चंद्रमोहन गुर्जर ने सड़क पर घायल को तड़पता देख तुरंत अपनी गाड़ी रोकी। एम्बुलेंस का इंतजार किए बिना, डॉक्टरों ने समय की नजाकत को समझा और डॉ. नितिन तोमर ने सड़क पर ही नरेंद्र को कार्डियोपल्मोनरी रिससिलेशन देना शुरू कर दिया।
कई मिनटों तक लगातार छाती को कंप्रेस करने के बाद चमत्कारिक रूप से नरेंद्र की रुकी हुई सांसें फिर से चलने लगीं। डॉक्टरों ने बिना देर किए घायल युवक को अपनी ही गाड़ी में लादा और पास के नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां फिलहाल उसका इलाज जारी है।
घटनाक्रम की मुख्य बातें
हादसे का स्थान: भोपाल-जबलपुर हाईवे, बरेली कस्बे के पास (रायसेन)।
फरिश्ता बने डॉक्टर्स: बेगमगंज सिविल अस्पताल के बीएमओ डॉ. नितिन तोमर और उनकी टीम।
घायल युवक: बानियाखेड़ी गांव का निवासी नरेंद्र।
त्वरित एक्शन: मौके पर ही तत्काल सीपीआर देकर सांसें वापस लाई गईं और खुद के वाहन से अस्पताल पहुंचाया।
गोल्डन ऑवर में इलाज से बची जान
भोपाल-जबलपुर हाईवे का बरेली और बाड़ी वाला पैच अक्सर तेज रफ्तार वाहनों के कारण एक्सीडेंट प्रोन एरिया माना जाता है। हादसे के बाद गोल्डन ऑवर (शुरुआती कीमती मिनट) में इलाज न मिलने से कई लोग जान गंवा देते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की मौजूदगी और बिना सरकारी प्रोटोकॉल या एम्बुलेंस का इंतजार किए उठाया गया यह कदम वाकई काबिले तारीफ है।

