गांधीनगर/गुजरात : राज्य में बिजली के पोल (बिजली के खंभे) लगाने के मुद्दे पर पिछले कुछ सालों से किसानों और प्रशासन के बीच चल रहा टकराव अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। अपनी जमीन और हक के लिए बिगुल बजा रहे अन्नदाताओं के बड़े आंदोलन के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा है। सूत्रों से मिली पक्की जानकारी के मुताबिक, सरकार अब इस विवाद का सुखद अंत करने के लिए किसान संगठनों के साथ बातचीत करने को तैयार है।
किसानों के मजबूत हौसले के आगे प्रशासन घुटनों पर!
किसानों ने अपने खेतों में गैर-कानूनी तरीके से या बिना मुआवजे के लगाए जा रहे बिजली के खंभों के खिलाफ जमकर लड़ाई लड़ी थी। किसानों के जबरदस्त विरोध, धरने और आंदोलन के कारण कई जगहों पर बिजली कंपनियों का कामकाज ठप हो गया था। इस आंदोलन के और बढ़ने और बड़ा राजनीतिक रूप लेने से पहले ही सरकार ने डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। ऐसी खबरें हैं कि अधिकारियों ने किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया है। क्या बातचीत टेबल पर जाएगी या बात बिगड़ेगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बातचीत से किसानों का आंदोलन खत्म होगा? किसानों की मांगें बहुत साफ हैं: ज़मीन का सही मुआवजा, खेती को नुकसान न पहुंचाने वाला दूसरा सिस्टम और तानाशाही रवैया खत्म। अगर सरकार किसानों की ये जायज़ मांगें मान लेती है, तभी यह झगड़ा शांत होगा। अगर सिर्फ भरोसा देकर मामले को निपटाने की कोशिश की गई, तो पूरी संभावना है कि किसान और ज़्यादा गुस्से में आकर आंदोलन को और तेज़ कर देंगे।
अब पूरे राज्य की नज़रें सरकार और किसानों के बीच होने वाली इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग पर टिकी हैं। देखना यह है कि सरकार किसानों को इंसाफ देती है या यह बातचीत सिर्फ कागज़ों पर ही सिमट कर रह जाती है!
महानगर मेट्रो न्यूज़, गांधीनगर।

