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डभोई में मानसून से पहले बड़ी मुसीबत का डर: 10 से 15 टूटे-फूटे घर ‘मौत का कुआं’ बन गए हैं, प्रशासन गहरी नींद में, लोग डर के साए में!

डभोई : जैसे-जैसे मानसून ज़ोरों से शुरू होने वाला है, डभोई शहर में एक बड़ा संकट मंडरा रहा है। शहर में पुराने और बहुत ज़्यादा टूटे-फूटे घर कभी भी बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। अभी डभोई नगर पालिका इलाके में करीब 10 से 15 घर ऐसे हैं। इस मामले में नगर पालिका प्रशासन ने घर के मालिकों को नोटिस देकर तसल्ली कर ली है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई पक्का काम न होने से स्थानीय लोगों की जान अधर में लटकी हुई है।

भीड़-भाड़ वाले इलाके ‘डेंजर ज़ोन’ बन गए हैं

डभोई के सबसे व्यस्त और चहल-पहल वाले इलाकों में ये टूटे-फूटे घर मौत का फंदा बनकर खड़े हैं। मुख्य रूप से:
बेगवाड़
चिड़ावाड़ बाज़ार
स्टेशन रोड
खटकीवाड़

ये ऐसे भीड़भाड़ वाले इलाके हैं जहाँ से हर दिन हज़ारों मासूम पैदल चलने वाले और गाड़ी चलाने वाले गुज़रते हैं। अगर ये टूटी-फूटी दीवारें या छतें तेज़ बारिश या मॉनसून की हवाओं में गिर गईं, तो बड़ी मौतों का सच में डर है।

कागज़ पर नोटिस जारी करके नगर पालिका ने मुंह की खाई है!

नगर पालिका ने बार-बार घर के मालिकों को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन बिल्डिंग मालिक इन खतरनाक स्ट्रक्चर को तोड़ने को तैयार नहीं हैं। दूसरी तरफ, ऐसा लगता है कि नगर पालिका सिर्फ़ कागज़ों पर घोड़े दौड़ाकर अपनी ज़िम्मेदारी से बच निकली है। लोगों का तीखा सवाल है, “अगर कोई बड़ा हादसा होता है और किसी की जान चली जाती है, तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार होगा? नगर पालिका सिस्टम या गैर-ज़िम्मेदार बिल्डिंग मालिक?”

शहरवासियों की गुस्से भरी मांग: अब कागज़ बंद करो, बुलडोज़र चलाओ!

प्रशासन की इस ढीली पॉलिसी के खिलाफ़ स्थानीय लोगों में बहुत गुस्सा है। शहर के लोगों की मांग है कि नगर पालिका कागज़ पर नोटिस जारी करने का खेल बंद करे और कानून का सख़्त रुख अपनाते हुए इन जर्जर मकानों को तुरंत गिराए। अगर मकान मालिक खुद से कंस्ट्रक्शन नहीं हटाते हैं, तो नगर पालिका अपने अधिकार का इस्तेमाल करके इन्हें गिराए और लोगों की जान बचाए। अब देखना यह है कि डभोई नगर पालिका प्रशासन किसी बेगुनाह की बलि चढ़ने का इंतज़ार करेगा या फिर जल्दी जागकर लोगों के हित में सख़्त कार्रवाई करेगा!

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