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दिल्ली में 923 कोचिंग सेंटरों का होगा फायर ऑडिट, नियमों का पालन नहीं करने वालों पर होगा एक्शन

दिल्ली में अब लापरवाह कोचिंग संस्थानों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। रेखा गुप्ता सरकार ने 923 कोचिंग संस्थानों का फायर ऑडिट करने का आदेश जारी कर दिया है। इसके लिए केवल 1 महीने का समय दिया गया है। कोई भी कोचिंग संस्थान जांच करने में सहयोग नहीं करेगा तो उसके ऊपर एक्शन लिया जाएगा।

नई दिल्ली: रेखा सरकार ने दिल्ली के कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है। दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद ने बताया कि शहर में करीब 923 से 924 कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं और इन सभी का अगले एक महीने के भीतर फायर ऑडिट और सुरक्षा निरीक्षण कराया जाएगा।

आशीष सूद ने मीडिया से कहा कि कोचिंग सेंटरों के लिए नियम और कानून तैयार करने के उद्देश्य से गठित समिति की बैठक बुलाई जा चुकी है। यह समिति गौबा कमेटी की सिफारिशों के आधार पर बनाई गई है। उन्होंने बताया कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को इस पूरी प्रक्रिया के लिए नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है।

1 महीने के भीतर करना होगा फायर ऑडिट

दिल्ली सरकार के मंत्री ने कहा कि नगर निगम के साथ सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर एक महीने के भीतर सभी 923-924 कोचिंग सेंटरों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान फायर सेफ्टी, सुरक्षा मानकों और अन्य जरूरी दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।

दस्तावेज नहीं होने पर कोचिंग संस्थान होंगे सील

उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन कोचिंग संस्थानों के दस्तावेज पूरे नहीं होंगे या जो सुरक्षा ऑडिट में तय मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें सील भी किया जा सकता है।

आशीष सूद ने यह भी बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर जल्द ही एक नया कानून लाया जाएगा। इस कानून में कोचिंग संस्थानों की फीस से लेकर संचालन और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

एनसीआरटी में इमरजेंसी का चैप्टर शामिल करने पर आशीष सूद ने दी प्रतिक्रिया

वहीं, कक्षा 9 की एनसीईआरटी किताब में आपातकाल (इमरजेंसी) का नया अध्याय शामिल किए जाने के सवाल पर भी दिल्ली सरकार के मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क्या होती है और घोषित तथा अघोषित आपातकाल में क्या अंतर होता है।

मंत्री आशीष सूद ने कहा कि देश के युवाओं को यह भी पता होना चाहिए कि आपातकाल के दौरान किस प्रकार की घटनाएं और अत्याचार हुए थे। लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़े ऐसे विषयों की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचना बेहद जरूरी है।

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