राजधानी के नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के अजमेरी गेट स्थित वेटिंग हॉल से एक मासूम बच्चे का अपहरण कर लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने कड़ी मेहनत के बाद बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया। इस मामले में पुलिस ने 8 आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के अजमेरी गेट साइड के वेटिंग हॉल से अगवा किए गए डेढ़ साल के मासूम को दिल्ली पुलिस की रेलवे यूनिट ने सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने एक संगठित बच्चा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान शिवा उर्फ गौरव, धर्मेंद्र, अकील, प्रीति शर्मा, पूजा, आरती, विशाल और जिया के रूप में हुई है।
डीसीपी बी. भरत रेड्डी के मुताबिक, 24 मई की सुबह करीब 6:30 बजे गाजियाबाद की चंदा कुमारी (26) ने शिकायत दी कि वह अपने डेढ़ साल के बेटे कार्तिक के साथ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के मुख्य हॉल में रुकी थीं। सुबह नींद खुलने पर बेटा वहां नहीं मिला। उन्होंने अपहरण की आशंका जताई। इंस्पेक्टर विश्वनाथ कैमरों की पासवान की देखरेख में एसआई दीप शर्मा, एएसआई बगीचा सिंह, संतोष, भरत सिंह, महिला कॉन्स्टेबल बबीता, रीता और रितु ने जांच शुरू की।
300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की
स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में तीन संदिग्ध लोग बच्चे को स्टेशन से बाहर जाते दिखाई दिए। पुलिस ने स्टेशन से गाजियाबाद के कासिम विहार तक करीब 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की। पता चला कि आरोपी पहले बैटरी रिक्शे से मोरी गेट पहुंचे। वहां से ऑटो से शास्त्री पार्क और फिर गाजियाबाद के कासिम विहार गए। बाद में वे दोबारा शास्त्री पार्क की ओर लौटे। उसके बाद ट्रक में लिफ्ट लेकर हरिद्वार फरार हो गए।
बच्चे का हुआ अपहरण
इसी दौरान हरिद्वार पुलिस से सूचना मिली कि वहां भी एक बच्ची का अपहरण हुआ है और संदिग्धों के चेहरे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से बच्चे को ले जाने वाले आरोपियों से मिलते-जुलते हैं। डिजिटल फरेंसिक तकनीकी जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और कई राज्यों में छापेमारी के बाद पुलिस ने गिरोह के आठ बदमाशों को दबोचा।
पुलिस कर रही लगातार जांच
आरोपियों की पहचान शिवा उर्फ गौरव, धर्मेंद्र, अकील, प्रीति शर्मा, पूजा, आरती, विशाल और जिया के रूप में हुई है। इसमें पूजा और आरती सागी बहनें हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि जिया, विशाल और शिवा रेलवे स्टेशन और अन्य संवेदनशील स्थानों से बच्चों का अपहरण कर उन्हें गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाते थे। आरती और उसकी बहन पूजा कथित तौर पर बच्चों की खरीद-फरोख्त में शामिल थीं। वहीं, धर्मेंद्र, उसकी पत्नी प्रीति और अकील इस नेटवर्क में बिचौलिये की भूमिका निभाते थे। पुलिस के अनुसार, अकील ने खुद को बच्चे का पिता बताकर जांच को गुमराह करने की कोशिश की।
बहन को बच्चा दिलाने के लिए 10 हजार लिए
पूजा ने ही बहन आरती के लिए अपहृत बच्चे को खरीदने में मदद की और तय किया कि बच्चा अपहरणकर्ताओं से खरीददार तक आसानी से पहुंच जाए। इसके लिए उसने अपहरणकर्ताओं से कहा कि वह अपनी बहन से रुपये नहीं ले सकती है। उसने 10 हजार रुपये लिए।

