दिल्ली में नवजातों खरीद-फरोख्त का बड़ा नेटवर्क चल रहा था। पुलिस ने इस नेटवर्क का भंड़ाफोड़ कर 5 नवजातों को बचाया है, साथ ही इस नेटवर्क के कई आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। जानकारी के मुताबिक, यह लोग असली जन्म दिखाने के लिए महिलाओं को अस्पताल में भर्ती करते थे और फर्जी बर्थ दिखाते थे।
नई दिल्ली: नवजात बच्चों को खरीदने और बेचने के धंधे का पता चलने के बाद स्पेशल स्टाफ की टीम ने बेगमपुर के हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में छापा मारकर अस्पताल की ओनर डॉ. विवेकी (47), ज्योति उर्फ कमलेश (37), शालू (43), ललित (3S), प्रतिभा (34), विपिन (33), ओमवती (45), साएबा भाई घमर उर्फ कालिया को गिरफ्तार किया है। जबकि बच्चा खरीदने वालों की पहचान मुकेश और रीमा, सन्नी अरोड़ा और रितु अरोड़ा और सरिका के रूप में हुई है। डॉ. विवेकी और साएबा गिरोह के मास्टरमाइंड है।
सेंट्रल जिला के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि जून के पहले वीक में उनकी टीम को पहाड़गंज से एक शख्स ने सूचना दी थी कि एक महिला बार-बार अलग-अलग बच्चों के साथ देखी जाती है। निगरानी के बाद महिला की पहचान की गई।
4-5 दिन का नवजात लेकर आए थे तस्कर
तस्करी का शक होने पर एक नकली ग्राहक महिला के पास भेजा गया। पहले उसने मना किया फिर तैयार हो गई। 20 हजार रुपये टोकन मनी दिए। 5 जून को नकली ग्राहक को बच्चा सौंपा गया। इस दौरान इशारा मिलते ही बच्चा मुहैया करवाने वाली महिला ज्योति उर्फ कमलेश को दबोच लिया। उसी दिन ज्योति की साथी शालू और ललित को दबोचा गया। तीनों महज 4-5 दिन का नवजात लेकर आए थे। तीनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने अस्पताल में रेड कर डॉ. विवेकी और फिर बाकी आरोपियों को पकड़ा।
4 बच्चे आदिवासी समुदाय से
डीसीपी के मुताबिक बचाए गए पांच बच्चों में चार आदिवासी समुदाय से संबंधित हैं, जबकि एक बच्चा दिल्ली का है। इनमें एक चार माह का नवजात पानीपत (हरियाणा) का है। 27 दिन के एक मेल और फिमेल नवजात ग्वालियर, मध्य प्रदेश के हैं। एक अन्य नवजात पानीपत का जबकि पांचवा नवजात दिल्ली का है। आरोपी राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों को लालच देकर उनके बच्चों को खरीद लेते थे। पुलिस के अनुसार यह संगठित गिरोह दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में सक्रिय था। बरामद सभी पांचों बच्चों को कार्रवाई के बाद शेल्टर होम में भेज दिया गया है। उनके परिजनों का पता लगाया जा रहा है।
10 से 15 हजार में खरीदते थे बच्चे
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि है कि लोगों को लालच देकर 10 से 15 हजार रुपये में बच्चा खरीदते हैं। इसके बाद उनको बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल लाया जाता था। अस्पताल में रखकर उसके खरीदार की तलाश की जाती है। लड़की को 4 से 5 लाख और लड़के को S से 10 लाख रुपये में बेच दिया जाता था। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि अलग-अलग नवजात बच्चों को जुड़वा भाई-बहन बता कर एक दंपती को 9 लाख रुपये में बेचा गया था।
अस्पताल की मालकिन विवेकी ने बीएससी नर्सिंग, एमएससी क्रिटिकल केयर और डॉक्टरेट किया है। उसने अपना अस्पताल बनाया हुआ है और यहां बच्चों के जन्म से लेकर आईवीएफ जैसी सुविधाएं हैं। डॉ. विवेकी से पूछताछ के बाद बच्चों की डील करवाने वाली महिला लैब टेक्निशियन प्रतिभा और बच्चों को लाने वाले कार ड्राइवर विपिन को दबोचा गया। छानबीन के दौरान पता चला कि नवजात बच्चों का इंतजाम, उदयपुर राजस्थान निवासी साएबा भाई घमर उर्फ कालिया करता था। फिलहाल वह सांवर कांथा, गुजरात में रह रहा था। वह पाली और गुजरात के कई इलाकों से लोगों को लालच देकर 10 से 15 हजार में बच्चा खरीदता था। इसके बाद उनको विपिन कार से दिल्ली ले आता था। यहां उसको हीरा अस्पताल में रखकर उसके खरीदार की तलाश की जाती है।
ग्वालियर से पकड़े गए दंपती मुकेश और रीमा पाल से पता चला कि उन्होंने 9 लाख में अस्पताल से एक लड़का और लड़की खरीदे थे। इन्हें जुड़वा बताकर बेचे गए थे, लेकिन दोनों जुड़वा नहीं थे। इनके अलावा पानीपत से पकड़े गए सन्नी अरोड़ा व उसकी पत्नी रितु अरोड़ा और सरिका के पास से 4 बच्चे बरामद हुए।
ऐसे काम करता था पूरा गिरोह
पुलिस जांच के अनुसार गिरोह एक सुनियोजित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था, जिसमें सप्लायर, बिचौलिए, ड्राइवर, अस्पताल से जुड़े लोग, दस्तावेज तैयार करने वाले और खरीदार शामिल थे। नवजात बच्चों को अलग-अलग राज्यों से दिल्ली लाया जाता था और रोहिणी के बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में रखा जाता था। इसी अस्पताल में उनके फर्जी जन्म से लेकर दूसरे कागजात तैयार किए जाते थे। निसंतान दंपतियों की पहचान कर उनसे संपर्क किया जाता था। बच्चों को फर्जी कागजों में उनके नाम पर दिखाकर लाखों रुपये लेकर बेच दिया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों की क्या थी भूमिका
ज्योति उर्फ कमलेशः गिरोह की मुख्य तस्कर और कोऑर्डिनेटर ।
शालूः ज्योति की सहयोगी, नवजात बच्चों की देखभाल और डिलिवरी का काम।
ललित: तस्करी से जुड़े लेन-देन में शामिल।
प्रतिभा : एमआरआईटी में मास्टर्स, फ्रींलास लैब टेक्नीशन और हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल से जुड़ी हुई। बच्चों की खरीद-फरोख्त में सक्रिय भूमिका। पूर्व में IGI एयरपोर्ट थाने के मानव तस्करी में भी शामिल रही है।
विपिन : बच्चों लाने और पहुंचाने का काम करता था।
ओमवती : बिचौलिए के रूप में बच्चों की व्यवस्था करने में शामिल।
डॉ. विवेकी: हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल की संचालिका। फर्जी मेडिकल और दस्तावेजी सहायता के जरिए गोद लेने की प्रक्रिया करती थी।
साएबा भाई घमर : गिरोह का मुख्य सप्लायर, राजस्थान और गुजरात से बच्चों की सप्लाई करता था।
कार्रवाई करने वाली टीम
इस ऑपरेशन को एसीपी ऑपरेशंस पदम सिंह राणा की देखरेख में इंस्पेक्टर संदीप यादव के नेतृत्व में एसआई प्रगति, एसआई यामिनी वत्स, एएसआई हमेदर, हेड कॉन्स्टेबल सुषमा, एएसआई सुनील, हेड कॉन्स्टेबल अनुज, हेड कॉन्स्टेबल मोहित और कॉन्स्टेबल इंद्रजीत ने अंजाम दिया।

