उद्धव ठाकरे के बुलावे के बावजूद उनकी पार्टी की अहम बैठक में सिर्फ तीन सांसदों का पहुंचे है। यह घटनाक्रम पार्टी के लिए बड़े राजनीतिक संकट की ओर इशारा कर रहा है।
मुंबई: शिवसेना यूबीटी के प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। शिवसेना यूबीटी की संसदीय दल की बैठक में नौ में से तीन ही लोकसभा एमपी पहुंचे। छह लोकसभा एमपी व्हिप के बाद भी नहीं आए। उद्धव गुट की मीटिंग में पहुंचने वाले सांसदों में राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे, अनिल देसाई और अरविंद सावंत शामिल है। बाकी के 6 सांसद की कोई खबर नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अलग गुट बनाया है और शिंदे की शिवसेना में विलय के लिए हस्ताक्षर कर दिए। बागी गुट का कहना है कि उद्धव ठाकरे पार्टी को कांग्रेस में विलय करना चाहते हैं, इससे बचने के लिए उन्होंने अलग रास्ता अपनाया है।
व्हिप का उल्लंघन करने वाले सांसदों को भेजेंगे नोटिस
बागी सांसदों को कहना है कि उन्हें अब पार्टी नेतृत्व पर भरोसा नहीं रह गया है। उद्धव गुट के सांसद अनिल देसाई ने 6 सांसदों की गैरहाजिरी पर कहा कि व्हिप का उल्लंघन करने वाले सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा। संसदीय दल की बैठक में मौजूद शिवसेना (UBT) सांसद राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे ने कहा कि वह पार्टी के संपर्क में हैं। उनकी लीडरशिप से लगातार बातचीत हो रही है।
बागी नेताओं के चेहरे पर गोबर पोतने की धमकी
इस बीच सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर के शिव सेना (यूबीटी) से बगावत करने की चर्चाओं की पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र में उनके धाराशिव निर्वाचन क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ताओं ने चेताया है कि पार्टी छोड़ने वालों के चेहरे पर गोबर पोता जाएगा। कार्यकर्ताओं ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी को धोखा देने वालों को धाराशिव में खुलेआम बाहर निकलने नहीं दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच शिवसेना (यूबीटी) के बागी नेताओं के एक समूह ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष बिरला से अनौपचारिक मुलाकात की और निचले सदन में पार्टी के नौ सांसदों में से छह के समर्थन का दावा किया।

