अहमदाबाद : गुजरात हाई कोर्ट ने साइबर क्राइम की जांच के नाम पर आम नागरिकों और बिजनेसमैन के बैंक अकाउंट को अंधाधुंध फ्रीज करने की पुलिस की प्रैक्टिस पर आंखें मूंद ली हैं। एक बहुत ही अहम फैसले में हाई कोर्ट ने साफ किया है कि सिर्फ शक के आधार पर या बिना जुर्म साबित हुए किसी भी नागरिक का बैंक अकाउंट फ्रीज करना उसके संवैधानिक अधिकारों का पूरी तरह से उल्लंघन है। कोर्ट के इस आदेश से उन हजारों बेगुनाह लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो साइबर पुलिस हैरेसमेंट के शिकार हैं।
जांच के नाम पर जनता को परेशान करना जायज़ नहीं : हाई कोर्ट
हाल ही में हाई कोर्ट में फाइल की गई अलग-अलग पिटीशन की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि साइबर फ्रॉड के छोटे-बड़े कनेक्शन के नाम पर पुलिस द्वारा पूरे बैंक अकाउंट लॉक किए जा रहे हैं। जिससे आम आदमी अपने ही पैसे का इस्तेमाल नहीं कर पाता और उसकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी और बिजनेस में बड़ा फाइनेंशियल संकट पैदा हो जाता है। इस मामले पर सख़्त रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि बैंक अकाउंट और उसमें जमा रकम संविधान के आर्टिकल 300A के तहत किसी व्यक्ति की प्रॉपर्टी है। बिना कानूनी प्रक्रिया और ठोस सबूत के किसी को किसी की प्रॉपर्टी इस्तेमाल करने से नहीं रोका जा सकता।
फैसले की मुख्य और अहम बातें
सिर्फ़ शक के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं: अगर किसी अकाउंट में कोई संदिग्ध ट्रांज़ैक्शन होता है, तो सिर्फ़ उसी वजह से पूरा अकाउंट फ़्रीज़ नहीं किया जा सकता।
पूरा अकाउंट फ़्रीज़ करने पर रोक: अगर अकाउंट में कोई धोखाधड़ी वाली रकम आई है, तो अकाउंट सिर्फ़ उस खास रकम के लिए ही होल्ड किया जा सकता है, पूरे अकाउंट का ट्रांज़ैक्शन बंद नहीं किया जा सकता।
ट्रेडर्स के लिए बड़ी राहत
ऑनलाइन बिज़नेस करने वाले ट्रेडर्स के अकाउंट में अगर अनजाने में कोई संदिग्ध पेमेंट आता है, तो पहले पुलिस सीधे अकाउंट बंद कर देती थी, जो अब बिना जुर्म साबित हुए नहीं किया जा सकता।
पुलिस के तरीके पर सवाल
कोर्ट ने कहा कि साइबर क्राइम टीमें अक्सर दूसरे राज्यों की पुलिस के निर्देश या मामूली लिंक के आधार पर तुरंत बैंक अकाउंट फ़्रीज़ कर देती हैं। पिटीशनर्स की तरफ से कहा गया कि इस प्रोसेस में नेचुरल जस्टिस के प्रिंसिपल्स को फॉलो नहीं किया जाता है और लोगों को अपनी बात रखने का मौका भी नहीं दिया जाता है।
हाई कोर्ट के इस लैंडमार्क जजमेंट के बाद अब साइबर पुलिस के मनमाने प्रोसेस पर रोक लग जाएगी। अब से पुलिस को बैंक अकाउंट्स फ्रीज करने से पहले काफी लीगल कारण और सबूत दिखाने होंगे, जो डिजिटल एज में आम पब्लिक के लिए एक वरदान साबित होगा।

