भोपाल में ब्लू लाइन मेट्रो के काम में तेजी आते ही डिपो चौराहा, जवाहर चौक और न्यू मार्केट रूट पर ट्रैफिक बेपटरी हो गया है। कन्फ्यूजिंग डाइवर्जन बोर्ड और खुले तारों के बीच वाहन चालक परेशान हैं।
मेट्रो के काम से भोपाल में रेंग रहीं गाड़ियां
भोपाल: राजधानी भोपाल में ब्लू लाइन मेट्रो प्रोजेक्ट के एलिवेटेड कॉरिडोर का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन इसके साथ ही शहर की सड़कों पर बदहाली और जाम का दौर भी शुरू हो चुका है। डिपो चौराहा से लेकर जवाहर चौक और न्यू मार्केट वाले सबसे चालू रास्ते पर गाड़ियों की रफ्तार बुरी तरह थम गई है।
रास्ते पर जगह-जगह सड़क की चौड़ाई कम हो गई है, तो कहीं बीचों-बीच टेलीकॉम केबल बिखरे पड़े हैं।
एक ही मंदिर के लिए दो अलग-अलग रास्ते दिखा रहे बोर्ड
सबसे ज्यादा अफरा-तफरी जवाहर चौक पर देखने को मिल रही है, जहां प्रशासन के डाइवर्जन बोर्ड लोगों की मदद करने के बजाय उन्हें और उलझा रहे हैं। एक साइनबोर्ड सीधा जाने का इशारा करता है, तो वहीं पास लगा दूसरा बोर्ड बाएं मुड़ने को कहता है, लेकिन मजे की बात यह है कि दोनों ही बोर्ड ‘हनुमान मंदिर’ पहुंचाने का दावा कर रहे हैं।
इस भ्रम के चलते वाहन चालक गाड़ियों के ब्रेक लगाने को मजबूर हैं, जिससे पीछे गाड़ियों की लंबी कतारें लग रही हैं।
अटल पथ का हिस्सा भी चपेट में, बीच सड़क पर काटी जा रही केबल
न्यू मार्केट के पास बन रहे एलिवेटेड कॉरिडोर की वजह से सड़क के बीच का डिवाइडर हटा दिया गया है। कभी आदर्श ‘स्मार्ट स्ट्रीट’ के तौर पर उभरे अटल पथ कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा इस निर्माण कार्य के दबाव में आ चुका है।
चलते ट्रैफिक के ठीक बगल में टेलीकॉम कर्मचारी ऑप्टिकल फाइबर केबल जोड़ते दिख रहे हैं, जिससे हादसे की आशंका बढ़ गई है।
ग्राउंड रिपोर्ट: इस रूट की 4 बड़ी समस्याएं
भ्रामक डाइवर्जन: जवाहर चौक पर साइनबोर्ड्स की गलती से रोजाना लग रहा जाम।
बड़ी गाड़ियों का रूट डायवर्ट: सिटी बसों को स्मार्ट सिटी एरिया के पीछे वाले तंग रास्तों से निकाला जा रहा है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं: बैरिकेडिंग नाकाफी है और कई जगह काम में लगी लाइटें सीधे ड्राइवरों की आंखों पर पड़ रही हैं।
खुली केबल का खतरा: मुख्य सड़क पर बिखरी यूटिलिटी लाइनें हादसों को न्योता दे रही हैं।
अधिकारियों का पक्ष नहीं मिल सका
अचानक बदले गए इस ट्रैफिक रूट से सबसे ज्यादा परेशानी दफ्तरों को जाने वाले और न्यू मार्केट खरीदारी करने आने वाले लोगों को हो रही है। इस पूरी अव्यवस्था और सुरक्षा के इंतजामों को लेकर मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MPMRCL) के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

