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दिल्ली दवा घोटाले में ACB का बड़ा एक्शन, पूर्व DGHS प्रमुख समेत दो गिरफ्तार

दिल्ली के चर्चित दवा खरीद घोटाले में ACB ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है. मामला करोड़ रुपये की खरीद में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है. जांच तेज होने के बाद अब इस केस में आगे और खुलासों की उम्मीद जताई जा रही है.

दिल्ली के कथित दवा खरीद घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है. इस मामले में पूर्व DGHS प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल और डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार किया गया है. दोनों पर दवाइयों के साथ ही मेडिकल सामान की खरीद में करोड़ों की हेराफेरी का आरोप है. यह बड़ी गिरफ्तारी शनिवार रात हुई, जिससे साफ है कि मामले की जांच अब काफी तेज हो गई है.

जांच टीम ने इस मामले में गहराई से छानबीन करने के बाद शनिवार रात को वत्सला अग्रवाल को अपनी कस्टडी में ले लिया. उनके साथ ही नीरज चोपड़ा को भी दबोचा गया है. यह कार्रवाई इस केस में पहले पकड़े गए विजय कुमार रंगा से पूछताछ के बाद हुई है. रंगा फिलहाल चार दिनों की पुलिस रिमांड पर चल रहे हैं. जांच एजेंसी का मानना है कि इन नई गिरफ्तारियों से इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करने में बड़ी मदद मिलेगी.

शुरुआती जांच में सामने आया है कि सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी के जरिए कई सौ करोड़ रुपयों की सरकारी रकम का दुरुपयोग किया गया. अस्पतालों के लिए पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, बेडशीट, एनेस्थीसिया उपकरण, ORS और जरूरी दवाइयां बेहद महंगे दामों पर खरीदी गईं. जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि कुछ चुनिंदा सप्लायरों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तें इस तरह तैयार की गईं कि कई योग्य सप्लायर प्रक्रिया से बाहर हो गए. इसी वजह से सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है.

मामले में डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस की रिपोर्ट के बाद 2 जून को भ्रष्टाचार निवारण कानून और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था. इसके बाद वत्सला अग्रवाल को DGHS के पद से हटाकर गुरु तेग बहादुर अस्पताल भेजा गया. बाद में अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत उन्हें निलंबित भी कर दिया गया.

विभाग की अपनी जांच में जब दवाइयों की खरीद, रखरखाव और उनके हिसाब-किताब में गड़बड़ी पाई गई, तो पांच फार्मासिस्ट समेत सीपीए के दो अधिकारियों को भी सस्पेंड कर दिया गया था. ACB का कहना है कि मामले की जांच जारी है. एजेंसी खरीद से जुड़े दस्तावेजों, टेंडर रिकॉर्ड और अन्य सबूतों की जांच कर रही है. साथ ही अन्य अधिकारियों और निजी सप्लायरों की भूमिका भी खंगाली जा रही है.

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