महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने शोक संदेश पढ़ते वक्त मराठी शब्दों के गलत उच्चारण पर खेद जताते हुए इसके पीछे तकनीकी वजहें बताई हैं.
महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने बुधवार को मॉनसून सत्र के पहले दिन सदन में शोक संदेश पढ़ते वक्त कुछ शब्द गलत बोलने पर खेद जताया. नार्वेकर ने कहा कि यह अनजाने में हुई गलती तकनीकी दिक्कतों और भाषण की प्रिंटेड कॉपी साफ न होने की वजह से हुई थी, उनका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था.
उन्होंने कहा, “सोमवार को शोक संदेश पढ़ते वक्त कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से मेरे द्वारा कुछ शब्द गलत बोले गए. मेरे पास मौजूद स्पीच की प्रिंटेड कॉपी साफ नहीं थी. जो कुछ भी हुआ, वह अनजाने में हुआ.”
स्पीकर ने कहा कि अगर इस घटना से किसी को बुरा लगा हो, तो उन्हें इसका खेद है. नार्वेकर ने कहा, “अगर इससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो मैं खेद प्रकट करता हूं. मेरा मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था.”
नार्वेकर ने कहा कि उन्हें मराठी भाषा पर भी उतना ही गर्व है. उन्होंने बताया कि पहले भी उन्होंने मराठी में कई भाषण दिए हैं. स्पीकर की तरफ से यह स्पष्टीकरण तब आया, जब विधानसभा में मशहूर प्लेबैक सिंगर आशा भोंसले, सुमन कल्याणपुर और पूर्व विधायकों के निधन पर शोक संदेश पढ़ते वक्त कुछ मराठी शब्दों के गलत उच्चारण को लेकर आलोचना हुई.
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मंगलवार को सदन में सिंगर आशा भोंसले के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ते वक्त मराठी भाषा का ‘गलत उच्चारण’ करने के लिए नार्वेकर की कड़ी आलोचना की.
एमएनएस प्रमुख ने कहा कि नार्वेकर ने मशहूर सिंगर-एक्टर दीनानाथ मंगेशकर (आशा भोसले के पिता) का नाम ‘दीनदयाल मंगेशकर’ लिया, फिर भी सदन में मौजूद किसी भी MLA को इस पर आपत्ति नहीं हुई. उन्होंने फेसबुक पर एक तीखी पोस्ट में कहा कि यह आशा भोसले के लिए नहीं ‘मराठी भाषा के लिए शोक प्रस्ताव’ था.
उन्होंने आगे कहा कि अगर नार्वेकर ने यह प्रस्ताव स्वाहिली या हिब्रू भाषा में दिया होता, तो भी कोई खास फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उनकी मराठी किसी को समझ ही नहीं आ रही थी.
हिंदी सिनेमा की संगीत पर आठ दशकों से ज्यादा वक्त तक राज करने वालीं आशा भोसले (92) का 12 अप्रैल को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया था. सदन ने पूर्व सदस्यों अनंतराव थोप्टे, विट्ठलराव धोते, बलिराम कोटकर-पाटिल, कृष्णराव देशमुख, पाटल्या मावस्कर, वसंतराव सूर्यवंशी, सुरेश कुमार जेठलिया, उषा देवी जगदाले और शकुंतला शर्मा के निधन पर भी शोक व्यक्त किया.

