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‘जो पार्टी छोड़ रहे, वो बीजेपी के गुलाम हैं…’ सांसदों के पाला बदलने पर भड़के आदित्य ठाकरे

शिवसेना UBT में बगावत के बीच आदित्य ठाकरे ने बीजेपी पर विपक्षी सांसदों को तोड़ने का आरोप लगाया है. वहीं पार्टी ने बागी सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर के बेटे कृष्णा पाटिल अष्टिकर को संगठन से निष्कासित कर दिया है.

महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय खींचतान काफी ज्यादा बढ़ गई है. अपने छह लोकसभा सांसदों की बगावत का सामना कर रही शिवसेना UBT के भीतर आदित्य ठाकरे ने पाला बदलने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने साफ कहा कि ‘जो लोग आज साथ छोड़ रहे हैं, वे बीजेपी के गुलाम बन चुके हैं’.

साथ ही, पार्टी विरोधी हरकतों के आरोप में बागी सांसद के बेटे को संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि बगावत करने वालों के खिलाफ अब नरमी नहीं बरती जाएगी.

आदित्य ठाकरे का कहना है कि विरोधियों का असली मकसद बाबासाहेब आंबेडकर के बनाए संविधान को बदलना है. इसके लिए विपक्ष के सांसदों को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि दो-तिहाई बहुमत हासिल किया जा सके. दल-बदल करने वालों को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि इन लोगों को पहले अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए, फिर दोबारा जनता के बीच चुनाव का सामना करना चाहिए. नासिक विधान परिषद सीट पर मिली हार का जिक्र करते हुए उन्होंने तंज कसा कि विपक्षी दल सिर्फ सरकार गिराने और तोड़ने के गंदे कामों में व्यस्त हैं.

इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच जमीनी स्तर पर भी बड़ा फैसला लिया गया. न्यूज एजेंसी पीटीआी के मुताबिक, संजय राउत ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उद्धव ठाकरे ने बागी सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर के बेटे कृष्णा पाटिल अष्टिकर को पार्टी से निकाल दिया है. कृष्णा पिछले दिनों हुए विधान परिषद चुनाव में नांदेड़ सीट से उम्मीदवार थे. उनके पिता नागेश उन छह सांसदों में शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में बगावती रुख अपनाया है.

दूसरी तरफ, पाला बदलने वाले हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर ने एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई पेश की है. उनका दावा है कि वह 18 जून तक कहीं नहीं गए थे, लेकिन कुछ बयानों की वजह से उन्हें यह कदम उठाना पड़ा. उन्होंने एकनाथ शिंदे के साथ जाने की बात स्वीकार की. नागेश का कहना है कि उन्होंने सिर्फ अपनी शिवसेना बदली है, विचारधारा नहीं छोड़ी. उनका आरोप है कि पिछले दो साल से कोशिश करने के बाद भी उन्हें अपने क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी फंड नहीं मिल पा रहा था.

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