हॉस्पिटल परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा: तोड़फोड़, मारपीट और धमकियों से सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं
गुजरात (न्यूज़ डेस्क) : एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई है जहाँ सिविल हॉस्पिटल, जहाँ गरीब और ज़रूरतमंद मरीज़ ठीक होने की उम्मीद में आते हैं, अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। हॉस्पिटल परिसर में असामाजिक और असामाजिक तत्वों के आतंक के कारण मरीज़, उनके रिश्तेदार और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ़ बहुत डर के साये में जी रहे हैं। मारपीट और तोड़फोड़ की लगातार घटनाओं ने हॉस्पिटल प्रशासन और स्थानीय पुलिस के सुरक्षा इंतज़ामों को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
इमरजेंसी के दौरान डॉक्टरों पर हमले और धमकियाँ
मिली जानकारी के अनुसार, असामाजिक तत्वों द्वारा परेशान करने की सबसे आम जगह हॉस्पिटल का ट्रॉमा सेंटर (इमरजेंसी वार्ड) और OPD एरिया है। अक्सर सिविल हॉस्पिटल में शराब के नशे में या किसी आपसी झगड़े की वजह से इलाज के लिए आने वाले लोग वहां मौजूद डॉक्टरों पर जल्दी इलाज करने का दबाव बनाते हैं। अगर मेडिकल स्टाफ नियम के हिसाब से काम करता है, तो उनके साथ गाली-गलौज की जाती है, जान से मारने की धमकी दी जाती है और कभी-कभी तो ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों पर जानलेवा हमले भी किए गए हैं। इस गुंडागर्दी की वजह से डॉक्टरों को अक्सर हड़ताल पर जाना पड़ता है, जिसका सीधा असर गरीब मरीजों के इलाज पर पड़ता है।
मरीजों और रिश्तेदारों की सुरक्षा को लेकर निश्चिंत रहें!
सिविल हॉस्पिटल के बड़े कैंपस में असामाजिक तत्व रात में अंधेरे का फायदा उठाकर चोरी, डकैती और छेड़छाड़ जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं। दूर-दराज के गांवों से आकर बरामदे या खुले में सोने वाले गरीब मरीजों के रिश्तेदारों के मोबाइल फोन, कैश और कीमती सामान की चोरी यहां रोज की बात हो गई है। महिला मरीजों और महिला स्टाफ की सुरक्षा को भी बड़ा खतरा है।
सिर्फ दिखावे के लिए सिक्योरिटी गार्ड?
हॉस्पिटल की सुरक्षा के लिए तैनात प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड इन असामाजिक तत्वों के सामने पूरी तरह बेबस नजर आते हैं। चूंकि गार्ड के पास कोई हथियार या अधिकार नहीं होता, इसलिए जब भी कोई बड़ा हंगामा होता है, तो वे भी अपनी जान बचाने के लिए एक तरफ हट जाते हैं। लोगों का आरोप है कि ऐसी घटनाओं के दौरान अस्पताल चौकी पर तैनात पुलिस भी मूकदर्शक बनकर तमाशा देखती रहती है, जिससे अपराधियों का हौसला और बढ़ रहा है।

