Homeभारतगुजरातआज़ादी के 78 साल बाद भी गांव अंधेरे में जी रहे हैं!...

आज़ादी के 78 साल बाद भी गांव अंधेरे में जी रहे हैं! मीराखेड़ी-कलीगाम के कई गांवों में बिजली नहीं, बच्चों का विकास और डिजिटल भविष्य दोनों अंधेरे में

पंकज पंडित : तालुको: जालोद : एक तरफ देश “डिजिटल इंडिया”, “स्मार्ट विलेज” और मॉडर्न डेवलपमेंट की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ दाहोद जिले के मीराखेड़ी, कलीगाम और आस-पास के गांवों के कई परिवार आज भी बिजली जैसी बेसिक सुविधाओं से महरूम हैं। आज़ादी के 78 साल पूरे होने के बावजूद भी कई घरों में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है, जिससे गांव वालों में बहुत गुस्सा और निराशा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, बिजली विभाग, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखकर और बोलकर बताने के बाद भी समस्या का कोई पक्का हल नहीं निकला है। नतीजतन, 100 से ज़्यादा परिवार आज भी अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। डिजिटल ज़माने में मोबाइल फ़ोन चार्ज करने के लिए भी भटकना पड़ता है।

आज मोबाइल फ़ोन पढ़ाई, जानकारी और सरकारी सर्विस पाने का एक ज़रूरी ज़रिया बन गया है। लेकिन बिजली न होने की वजह से गाँव वालों को अपने मोबाइल फ़ोन चार्ज करने के लिए दूसरे गाँव या जान-पहचान वालों के घर जाना पड़ता है। जहाँ पूरी दुनिया टेक्नोलॉजी के साथ आगे बढ़ रही है, वहीं इस इलाके के लोग आज भी बेसिक सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।

बिजली न होने की वजह से स्टूडेंट्स को रात में पढ़ाई करने में बहुत दिक्कत होती है। चाहे एग्जाम की तैयारी हो या ऑनलाइन पढ़ाई, बिना बिजली वाले बच्चे दूसरे स्टूडेंट्स से पीछे रह जाते हैं। डिजिटल पढ़ाई के ज़माने में इन बच्चों को इंटरनेट, ऑनलाइन क्लास और टेक्नोलॉजी से दूर रहना पड़ता है, जो उनके हर तरह के विकास में रुकावट बन रहा है।

अंधेरे में खाना बनाना, बच्चों और बुज़ुर्गों का ध्यान रखना और रात में कीड़ों और ज़हरीले जानवरों का डर – यह सब गाँव वालों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है। खासकर महिलाओं को शाम के बाद ज़्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

गाँव वालों के मुताबिक, कुछ साल पहले मीराखेड़ी में एक मॉडल स्कूल बनाया गया था। प्रभावित इलाके से सिर्फ़ 500 मीटर दूर इस स्कूल में बिजली की सुविधा है, लेकिन आस-पास रहने वाले गरीब परिवारों के घरों में बिजली नहीं पहुंची है। यह बात विकास के दावों पर कई सवाल खड़े कर रही है।
सरकार हर घर में बिजली पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन मीराखेड़ी और कलिगाम की झुग्गियों में आज भी अंधेरा पसरा हुआ है। इन परिवारों को भले ही विकास के आंकड़ों में शामिल किया गया हो, लेकिन असल में इनके घरों में अभी तक एक भी बल्ब नहीं जला है। सवाल यह है कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच क्या ये परिवार आज भी सरकारी सिस्टम की नज़र से दूर हैं?

इस बारे में मीडिया टीम ने MGVCL के एक अधिकारी से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि तुरंत सर्वे किया जाएगा और नियम के मुताबिक सभी योग्य घरों में बिजली पहुंचाने के लिए ज़रूरी कार्रवाई की जाएगी।

प्रभावित गांववालों ने मांग की है कि तुरंत सर्वे किया जाए और सभी घरों में बिजली पहुंचाई जाए। गांववालों का कहना है कि अब सिर्फ़ भरोसे की नहीं, बल्कि असल में कार्रवाई की ज़रूरत है ताकि उनके बच्चे भी डिजिटल युग से जुड़ सकें और गांवों से अंधेरा खत्म हो।

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