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बागी सांसदों को गाली देने पर आई संजय राउत की सफाई, कहा- गलत क्या है, हम मराठी भाषा में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने पार्टी के सांसदों को तोड़ने की कोशिश का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए 15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की गई है। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कि उनके हलिया बयान में कुछ भी गलत नहीं था।

मुंबई/नई दिल्ली: शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने पार्टी के सांसदों को तोड़ने की कोशिश का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए 15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की गई है। पार्टी ने संसदीय बैठक के लिए व्हिप जारी किया है और लोकसभा अध्यक्ष को भी पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि बगावत करने वाले सांसदों को छोड़ा नहीं जाएगा। इस दौरान प्रेसवार्ता में यूबीटी से बगावत करने वाले सांसदों को अपशब्द कहने पर संजय राउत ने बेबाक राय रखी। राउत ने कहा कि इसमें गलत क्या है? गाली-गलौज पर संजय राउत ने कहा कि हम मराठी भाषा में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

संजय राउत ने क्या कहा?

बागी सांसदों के लिए इस्तेमाल की गई भाषा पर शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने कहा कि हम मराठी भाषा में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इसमें गलत क्या है? मुझे अच्छी तरह पता है कि कौन सी भाषा कब इस्तेमाल करनी है। जो भाषा कोई समझता हो, वही इस्तेमाल करनी चाहिए। मैंने पार्लियामेंट में ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है। जो आदमी 15 करोड़ रुपये लेकर पार्टी छोड़ दे, उसके बारे में आप क्या कहेंगे? क्या आप ऐसे आदमी पर फूल बरसाएंगे?

सांसदों के बगावत पर भड़के राउत?

इससे पहले मीडिया से बातचीत के दौरान कुछ सांसदों के बगावत करने संबंधी सवाल पर संजय राउत ने कहा कि फिलहाल मुझे लगता है कि सभी साथ हैं और पार्टी एकजुट है। मेरे पास किसी आधिकारिक इस्तीफे या पार्टी छोड़ने की कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, मीडिया के जरिए हमें ऐसी खबरें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे की अगुवाई में मातोश्री पर सांसदों की बैठक हुई थी, जिसमें कुछ सांसद व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे, जबकि अन्य वर्चुअली शामिल हुए थे। राउत के अनुसार, बैठक में सभी सांसदों ने पार्टी और उद्धव ठाकरे के साथ रहने की बात कही थी।

संजय राउत ने दी चेतावनी

राउत ने कहा कि अगर इसके बावजूद कोई शिवसेना से बेइमानी करना चाहता है, तो हम उसे छोड़ेंगे नहीं। बगावत करने वाले सांसद शिवसेना (यूबीटी) के चुनाव चिह्न पर चुने गए हैं। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा गया है और पार्टी की बैठक भी बुलाई गई है। राउत ने कहा कि जो सांसद पाला बदलना चाहते हैं, उन्हें पहले इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में सांसदों की खरीद-फरोख्त की जा रही है और भाजपा शिवसेना को तोड़ने का प्रयास कर रही है। हालांकि, भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

15-15 करोड़ में बिक गए सांसद?

राउत ने यह भी दावा किया कि कुछ सांसदों तक 15-15 करोड़ रुपये रात को ही पहुंचाए जा चुके हैं और वे चार्टर्ड विमान से रवाना हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सांसद संजय राउत ने आगे कहा कि ये सभी हमारी पार्टी के सदस्य, सांसद और प्रतिनिधि हैं, जिनके लिए हमारे कार्यकर्ताओं ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में बहुत लगन और त्याग के साथ काम किया है। हमने उन्हें टिकट दिए, चुनाव के लिए आर्थिक मदद की और अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव कोशिश की। इतनी कोशिशों के बाद भी अगर उनके बारे में ऐसी खबरें आ रही हैं, तो उन्हें सामने आकर साफ तौर पर इनका खंडन करना चाहिए। मैं एक बार फिर कहना चाहता हूं कि यह स्थिति जारी नहीं रह सकती। अगर कोई छोड़ना चाहता है, तो उसे पहले इस्तीफा देना चाहिए। महाराष्ट्र की जनता अब चुप नहीं बैठेगी।

‘ऑपरेशन टाइगर’ पर कटाक्ष

संजय राउत ने एक्स पर लिखा कि एक चार्टर्ड विमान नांदेड़ हवाई अड्डे पर उतरता है। यह ‘ऑपरेशन टाइगर’ के गुप्त नाम से दो सांसदों को ले जाता है। उनके पास रिक्शा में यात्रा करने की भी हैसियत नहीं थी। फिर भी, ‘ठाकरे’ ब्रांड की बदौलत, उनका रुतबा इतना बढ़ गया कि वे निजी जेट में यात्रा कर सकें। हर एक चीज़ का हिसाब रखा जाएगा। इन कायर गीदड़ों की उड़ान के लिए, आप इन्हें ‘टाइगर’ क्यों कहते हैं?

संजय राउत के गाली देने पर क्या बोले संजय निरुपम?

शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के बयान पर शिवसेना नेता संजय निरुपम कहते हैं कि संजय राउत, जो कभी अपने सांसदों के बारे में सम्मान से बात करते थे, अब उन्हें अपशब्द कहने लगे हैं। यह उनकी पार्टी की लीडरशिप के पतन को दिखाता है। वे हिंदुत्व से दूर हो गए हैं। इससे कार्यकर्ता, कैडर, विधायक और सांसद बहुत असंतुष्ट और बेचैन हैं। इसे समझने के बजाय, वे अपने ही लोगों को दोष देते हैं और उनका अपमान करते हैं, और ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं जो सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।

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