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सौरभ भारद्वाज के खिलाफ मानहानि केस में स्टेटमेंट दर्ज कराने नहीं पहुंच सके प्रवेश वर्मा, कोर्ट ने दी 4 जुलाई की तारीख

प्रवेश वर्मा और सौरभ भारद्वाज के बीच मानहानि मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई 4 जुलाई तक टाल दी है। आरोप है कि ट्रस्ट में नियुक्तियों को लेकर झूठे बयान दिए गए। दोनों पक्षों के बीच आपराधिक और सिविल मानहानि मामले अदालत में चल रहे हैं।

अगली सुनवाई 4 जुलाई को तय

नई दिल्लीः दिल्ली सरकार में मंत्री और भाजपा नेता प्रवेश वर्मा द्वारा आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले मेंमंगलवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान प्रवेश वर्मा की ओर से अदालत से उनका बयान दर्ज कराने के लिए समय मांगा गया। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि व्यस्तता के कारण प्रवेश वर्मा निर्धारित तारीख पर पेश नहीं हो सके।

कोर्ट में दर्ज होगा बयान

अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई तय की है।
अब 4 जुलाई को राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रवेश वर्मा का बयान दर्ज किया जाएगा।

दरअसल, आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया था कि प्रवेश वर्मा ने ‘एस.एस. मोटा सिंह स्कूल ट्रस्ट’ में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने करीबी सहयोगियों की नियुक्ति कराई है।

भारद्वाज ने दावा किया था कि इस ट्रस्ट के पास करीब 500 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

कोर्ट पहुंचा मामला

इन आरोपों को प्रवेश वर्मा ने पूरी तरह झूठा, निराधार और मानहानिकारक बताते हुए सौरभ भारद्वाज के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई है।

इस मामले से जुड़े सिविल मानहानि मुकदमे में भी कार्रवाई जारी है। प्रवेश वर्मा द्वारा दायर सिविल मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सौरभ भारद्वाज को समन जारी किया और उन्हें 30 दिनों के भीतर लिखित जवाब तथा हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

5 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग

सिविल मानहानि मामले में प्रवेश वर्मा ने सौरभ भारद्वाज से 5 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की है। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। प्रवेश वर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके खिलाफ झूठे, दुर्भावनापूर्ण और अत्यधिक अपमानजनक पोस्ट और वीडियो शेयर किए थे। जिसमें आरोप लगाया गया कि एक मंत्री के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करके उन्होंने अपने एक सहयोगी को निजी स्कूल ट्रस्ट में ट्रस्टी नियुक्त किया।

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