बारिश के पानी की निकासी, अंडरपास और खेती की समस्याओं को लेकर किसानों का फूटा गुस्सा; प्रशासन ने संयुक्त सर्वे का दिया आश्वासन
झालोद (दाहोद)। दाहोद जिले के लिमडी क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर हाईवे से प्रभावित 14 गांवों के आदिवासी किसानों की वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर झालोद प्रांत कार्यालय में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। प्रांत अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में हाईवे अथॉरिटी, बिजली विभाग और जल आपूर्ति विभाग सहित विभिन्न सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। किसानों का आरोप है कि पिछले चार वर्षों से हाईवे निर्माण कार्य के कारण क्षेत्र में बारिश के पानी की निकासी गंभीर समस्या बन गई है। कई गांवों के खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से फसलें खराब हो रही हैं और कृषि भूमि अनुपयोगी होती जा रही है। इससे प्रभावित किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। बैठक के दौरान किसानों के प्रतिनिधियों ने वर्षा जल निकासी, खेतों तक पहुंचने वाले रास्ते, बिजली लाइन, अंडरपास और ओवरब्रिज जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रांत अधिकारी ने संबंधित विभागों को तत्काल स्थल निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने घोषणा की है कि 4 जून 2026 को सभी 14 प्रभावित गांवों में विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम द्वारा सर्वे किया जाएगा और वास्तविक स्थिति के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान किसान नेता मुकेश डांगी ने प्रस्तावित एयरपोर्ट और जीआईडीसी परियोजनाओं का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर आदिवासी किसानों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहित करना अन्यायपूर्ण है। जमीन आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व का आधार है, जिसे बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। बैठक के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी 30 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो क्षेत्र के किसान “करो या मरो” आंदोलन शुरू करेंगे। फिलहाल 14 गांवों के हजारों किसानों की निगाहें 4 जून को होने वाले संयुक्त सर्वे और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

