JNU के पूर्व प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोचमा बिमोल अकोइजम को यौन उत्पीड़न मामले में अदालत से राहत मिली है। कोर्ट ने पुलिस को गिरफ्तारी या हिरासत में पूछताछ से पहले सात कार्यदिवस का लिखित नोटिस देने का निर्देश दिया है।
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोचमा बिमोल अकोइजम को यौन उत्पीड़न के मामले में तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिली है। दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि अगर जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार करने या हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत पड़ती है, तो इससे पहले सात दिनों का लिखित नोटिस देना होगा। नोटिस व्यक्तिगत रूप से देना अनिवार्य होगा, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नहीं।
स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि अकोइजम के खिलाफ नोटिस दिए बिना कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। अदालत ने उन्हें कानूनी उपाय अपनाने के लिए पर्याप्त समय देने की बात कही है।
पुलिस ने कहा- फिलहाल गिरफ्तारी की योजना नहीं
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक मनीष रावत ने अदालत को बताया कि शिकायत की प्रकृति और जांच के मौजूदा चरण को देखते हुए पुलिस फिलहाल अकोइजम को गिरफ्तार करने पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने भरोसा दिया कि अगर जांच में कोई नया तथ्य सामने आता है और गिरफ्तारी की जरूरत पड़ती है, तो उन्हें सात दिन पहले नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि गिरफ्तारी या हिरासत में पूछताछ की जरूरत होने पर स्पष्ट रूप से सात कोर्ट कार्यदिवस पहले लिखित नोटिस दिया जाए।
अभी तक शिकायतकर्ताओं से पूछताछ नहीं
अदालत ने अपने आदेश में यह भी ध्यान दिया कि जांच अधिकारी ने अभी तक किसी शिकायतकर्ता से पूछताछ नहीं की है। इसकी वजह यह है कि यूनिवर्सिटी ने शिकायतकर्ताओं की जानकारी पुलिस को उपलब्ध नहीं कराई है। अदालत ने यह भी कहा कि जिन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, उनमें अधिकतम सजा तीन साल की कैद है। इसके अलावा अकोइजम का पिछला रिकॉर्ड साफ है और पुलिस के बुलाने पर वह जांच में शामिल भी हुए हैं। वह अब तक एक बार जांच अधिकारी के सामने पेश हो चुके हैं।
जांच में सहयोग करना होगा
अदालत ने अकोइजम को निर्देश दिया है कि पुलिस जब भी उन्हें जांच में शामिल होने के लिए बुलाए, वह पेश हों। साथ ही पुलिस को कहा गया है कि जांच में सहयोग न करने की स्थिति में उचित निर्देश के लिए अदालत का रुख किया जा सकता है। बिना लिखित नोटिस दिए उनके खिलाफ कोई दंडात्मक प्रक्रिया शुरू नहीं की जाए।
क्या है मामला?
यह मामला 18 मई को कम से कम 11 JNU छात्राओं की ओर से की गई शिकायत से जुड़ा है। छात्राओं ने अकोइजम पर यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए थे। शिकायतों की जांच के लिए गठित जेएनयू की पांच सदस्यीय समिति ने उनके खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी।
इसके बाद यूनिवर्सिटी ने 9 अक्टूबर को उन्हें बर्खास्त कर दिया था। हालांकि, 2 नवंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगा दी थी।
समिति की रिपोर्ट 11 अक्टूबर को पुलिस को भेजी गई थी। इसके बाद वसंत कुंज नॉर्थ थाने में इस मामले में FIR दर्ज की गई। मामले की जांच जारी है।

