चैतर वसावा के समर्थन में उमड़ा आदिवासी समाज, जल-जंगल-जमीन के अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर सरकार के सामने रखी चुनौती
गांधीनगर। गुजरात की राजधानी गांधीनगर में आदिवासी समाज के अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर आयोजित विशाल आदिवासी न्याय महासम्मेलन में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। डेडियापाड़ा के विधायक चैतर वसावा के समर्थन में आयोजित इस सम्मेलन में उनकी पत्नी शकुंतलाबेन वसावा ने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई किसी भी दबाव के सामने नहीं रुकेगी।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए शकुंतलाबेन वसावा ने पुलिस कार्रवाई और सरकार की नीतियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लोगों पर चाहे कितने भी मामले दर्ज किए जाएं या उन्हें जेल में बंद किया जाए, लेकिन जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने चैतर वसावा के खिलाफ हुई कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया और कहा कि सरकार के दबाव से आदिवासी समाज की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
उनके इस संबोधन के दौरान सम्मेलन में उपस्थित लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन जताया और आदिवासी एकता के नारे लगाए।
गांधीनगर में आयोजित यह महासम्मेलन केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आदिवासी समाज की एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच बन गया। सम्मेलन में राज्य के विभिन्न आदिवासी क्षेत्रों से आए लोगों ने सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए। इसके साथ ही आदिवासी समाज को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।
आयोजकों और समर्थकों के अनुसार, प्रशासन की ओर से लगाई गई विभिन्न पाबंदियों और कठिनाइयों के बावजूद बड़ी संख्या में लोग सम्मेलन में पहुंचे। इससे राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।
चैतर वसावा के समर्थन में आयोजित इस सम्मेलन और शकुंतलाबेन वसावा के आक्रामक संबोधन ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। आदिवासी समाज के अधिकारों और सरकार की नीतियों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

