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डभोई में आधुनिकता की चमक के बीच मिट्टी के दीपकों का अस्तित्व संकट में

चीनी बिजली की लड़ियों और प्लास्टिक के सजावटी दीपकों ने घटाई मांग, प्रजापति समाज के कुम्हार परिवारों की आजीविका पर मंडराया संकट

डभोई। अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व दीपावली नजदीक आते ही बाजारों में सजावटी वस्तुओं की रौनक बढ़ गई है। लेकिन गुजरात के ऐतिहासिक नगर डभोई में परंपरागत मिट्टी के दीपक बनाने वाले प्रजापति समाज के कुम्हार परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। चीनी बिजली की लड़ियों, प्लास्टिक के रंगीन दीपकों और चमकदार सिरेमिक वस्तुओं की बढ़ती मांग के कारण मिट्टी के पारंपरिक दीपकों की बिक्री प्रभावित हो रही है।

प्रजापति समाज के कारीगर दीपावली से कई महीने पहले ही मिट्टी के दीपक तैयार करने में जुट जाते हैं। मिट्टी लाने, चाक पर दीपक बनाने, उन्हें धूप में सुखाने और भट्ठी में पकाने की कठिन प्रक्रिया के बाद तैयार माल बाजार में पहुंचाया जाता है। लेकिन इस बार मांग में गिरावट के कारण बड़ी मात्रा में दीपक बिक नहीं पा रहे हैं। इससे कारीगरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

एक समय था जब दीपावली के अवसर पर डभोई के बाजारों में मिट्टी के दीपक खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती थी। घरों में पारंपरिक मिट्टी के दीपक जलाने की परंपरा प्रमुख थी। लेकिन अब रंग-बिरंगी बिजली की रोशनी और आकर्षक सजावटी वस्तुओं के बढ़ते चलन ने मिट्टी के दीपकों की मांग को प्रभावित किया है।

कारीगरों का कहना है कि दिन-रात मेहनत करके हजारों दीपक तैयार करने के बावजूद उन्हें लागत के बराबर भी कीमत नहीं मिल पा रही है। तैयार माल नहीं बिकने से परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। कई परिवारों के सामने दीपावली के त्योहार पर अपने घरों में दीपक जलाने तक की चिंता खड़ी हो गई है।

स्थानीय कारीगरों और परंपरा के समर्थकों ने लोगों से मिट्टी के दीपक खरीदने की अपील की है। उनका कहना है कि देशी कारीगरों को प्रोत्साहन देने के लिए स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

सरकार और जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने की अपील के बीच कुम्हार परिवारों की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। यदि स्थानीय नागरिक मिट्टी के दीपकों की खरीद को प्राथमिकता नहीं देंगे, तो आने वाले समय में चाक पर दीपक बनाने की सदियों पुरानी कला के सामने अस्तित्व का संकट और गहरा सकता है।

कारीगरों को उम्मीद है कि इस दीपावली लोग स्थानीय उत्पादों को अपनाकर उनके घरों में भी खुशियों का प्रकाश पहुंचाएंगे।

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