करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद गंदगी का स्थायी समाधान नहीं, कचरे को छिपाने के लिए लगाए गए पर्दे हटते ही बिगड़ी तस्वीर सामने आई
डभोई। गुजरात के ऐतिहासिक नगर डभोई में वीआईपी संस्कृति और प्रशासन की कथित दोहरी नीति के खिलाफ स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। प्रधानमंत्री और अन्य उच्च अधिकारियों के दौरे के दौरान नगर में स्वच्छता के नाम पर की गई दिखावटी व्यवस्थाओं की वास्तविकता उनके लौटते ही सामने आ गई। नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन ने गंदगी का स्थायी समाधान करने के बजाय उसे छिपाने पर सरकारी धन खर्च किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एकता की प्रतिमा जाने वाले विशिष्ट अतिथियों के आवागमन को ध्यान में रखते हुए डभोई-शिनोर चौराहे से नांदोदी दरवाजे तक मार्ग के दोनों ओर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। स्वच्छता के बड़े-बड़े नारों के बीच वर्षों से जमा कचरे, गंदगी और दुर्गंध को छिपाने के लिए विशाल पट्टिकाएं, आकर्षक चित्रपट और कपड़ों के पर्दे लगाए गए थे। आरोप है कि वास्तविक सफाई करने के बजाय बाहर से आने वाले अतिथियों की नजरों से नगर की बदहाल स्थिति छिपाने का प्रयास किया गया।
प्रधानमंत्री और उच्च अधिकारियों का दौरा समाप्त होते ही लगाए गए पर्दे और पट्टिकाएं हटा लिए गए। इनके हटते ही सड़क किनारे पुराने कचरे के ढेर, प्लास्टिक का कचरा और दुर्गंध फिर दिखाई देने लगी। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि करदाताओं की मेहनत की कमाई को सफाई के स्थायी समाधान के बजाय दिखावे पर खर्च कर दिया गया।
नागरिकों का कहना है कि जब भी किसी विशिष्ट अतिथि का दौरा होता है, तब रातोंरात सड़कें सुधारी जाती हैं, रोशनी की व्यवस्था होती है और स्वच्छता का प्रदर्शन किया जाता है। लेकिन नियमित रूप से कर चुकाने वाले स्थानीय लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। बरसात हो या सामान्य दिन, उफनती नालियां, खराब सड़कें और गंदगी लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं।
प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए नागरिकों ने पूछा है कि क्या सरकारी सुविधाएं केवल विशिष्ट अतिथियों के दौरे तक सीमित रहेंगी? गंदगी छिपाने पर धन खर्च करने के बजाय स्थायी सफाई व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जाती? क्या नगरवासियों को गंदगी और बीमारियों के खतरे से कभी मुक्ति मिलेगी?
स्थानीय नागरिकों ने तत्काल स्थायी सफाई व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द उचित कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में आंदोलन किया जा सकता है।

