वर्ष 2005 में बने पुल की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल; 204 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे नए पुल में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की विधायक डॉ. दर्शनाबेन देशमुख ने की मांग
, राजपीपला। नर्मदा और वडोदरा जिलों को जोड़ने वाले राजपीपला-वडोदरा मार्ग पर स्थित पोइचा रंग सेतु पुल पिछले करीब एक साल से भारी वाहनों के लिए बंद है। पुल पर बड़े और भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक के कारण क्षेत्र के नागरिकों, व्यापारियों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राजपीपला से वडोदरा और आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने वाले मालवाहक वाहनों को अब करीब 40 किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे समय और ईंधन की खपत बढ़ने के साथ परिवहन लागत पर भी असर पड़ रहा है।
नर्मदा नदी पर बना यह पुल दोनों जिलों के बीच आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। भारी वाहनों के लिए रास्ता बंद होने से माल की ढुलाई करने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। लंबा रास्ता तय करने के कारण माल पहुंचाने में अधिक समय लग रहा है और परिवहन खर्च भी बढ़ रहा है। इसका असर व्यापारियों और माल परिवहन से जुड़े कारोबारियों पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद रहने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
इस मामले में पुल के निर्माण और उसकी गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, पोइचा रंग सेतु पुल का निर्माण वर्ष 2005 में हुआ था। करीब दो दशक बाद पुल की ऐसी स्थिति बनने और भारी वाहनों के लिए आवाजाही रोकने की जरूरत पड़ने से निर्माण की मजबूती, रखरखाव और गुणवत्ता की जांच की मांग उठ रही है। नागरिकों का सवाल है कि पुल की स्थिति इतनी खराब होने के पीछे क्या कारण रहे और समय-समय पर इसकी देखरेख तथा मरम्मत के लिए क्या कदम उठाए गए। हालांकि, पुल की मौजूदा स्थिति और उसकी तकनीकी खामियों के वास्तविक कारणों का पता विशेषज्ञों की जांच से ही चल सकेगा।
समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार की ओर से 204 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना को लेकर स्थानीय विधायक डॉ. दर्शनाबेन देशमुख ने सरकार और सड़क एवं भवन विभाग के सामने अपनी मांग रखी है। उन्होंने कहा है कि नए पुल के निर्माण में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए और गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन करने और परियोजना को तय समय-सीमा में पूरा करने पर भी जोर दिया है।
विधायक ने यह भी मांग की है कि पुराने पुल की स्थिति से जुड़े अनुभवों को ध्यान में रखते हुए नए पुल के निर्माण में सभी तकनीकी और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी दोबारा सामने न आए। 204 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में सरकारी धन का उचित उपयोग और निर्माण की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की जरूरत भी जताई गई है।
फिलहाल भारी वाहनों के लिए पुल बंद रहने से आम लोगों और परिवहन कारोबारियों की परेशानी बनी हुई है। अब क्षेत्र के नागरिकों को नए पुल के निर्माण कार्य में तेजी आने और परियोजना के समय पर पूरा होने का इंतजार है। साथ ही, पुराने पुल की स्थिति और उसकी गुणवत्ता से जुड़े सवालों पर भी संबंधित विभागों से स्पष्ट जानकारी देने की अपेक्षा की जा रही है।

