गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने नर्मदा जिले के सागबरा में एक किसान सम्मेलन के दौरान आरक्षण और मैला उठाने और जाति आधारित टिप्पणी राज्य में भारी बवाल मच गया है। शुक्रवार को वाघेला ने यह बयान दिया। ब्राह्मण समाज ने वाघेला को माफी मांगने के लिए 72 घंटे का समय दिया है। बीजेपी और कांग्रेस ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
हाइलाइट्स
गुजरात के पूर्व CM शंकर सिंह वाघेला का बड़ा बयान
आरक्षण के मुद्दे सवर्ण जातियों पर की बड़ा टिप्पणी
नर्मदा में आयोजित किसान सम्मेलन में की टिप्पणी
अहमदाबाद: गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला एक बयान पर राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। नर्मदा जिले में किसान सम्मेलन में पूर्व सीएम शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि जो लोग आरक्षण के विरोधी हैं, यदि सवर्ण जातियों (जैसे पटेल, वाणिया और ब्राह्मण) के लोग आदिवासी समाज का मैला (सफाई कार्य) उठाएं, तो वे उन्हें 50,000 रुपये महीना वेतन देने को तैयार हैं। शंकर सिंह वाघेला के बयान पर अभी तक बीजेपी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पटेल (पाटीदार), वाणिया और ब्राह्मण समाज के लोगों ने माफी मांगने की मांग की है। शंकर सिंह वाघेला के बयान पर राजनीति ऐसे वक्त पर गरमाई है जब उनके कांग्रेस में वापस लौटने की चर्चा हो रही है।
वाघेला के बयान गरमाई राजनीति
पीएम मोदी के साथ एक वक्त पर गुजरात में बीजेपी को मजबूत करने वाले वाघेला गुजरात में बापू के तौर पर मशहूर हैं। शंकर सिंह वाघेला पूर्व में गुजरात के सीएम रह चुके हैं। वह पीएम मोदी को निकट से जानते हैं लेकिन बापू के बयान पर राजनीति गरमा गई है। उनके इस बयान के बाद राजकोट और अन्य स्थानों पर ब्रह्म समाज व अन्य सवर्ण संगठनों के युवाओं में भारी आक्रोश देखा गया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि वाघेला ने अपने इस बयान के लिए तीन दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, तो उनके आवास ‘वसंत वगडाे’ तक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और राज्यव्यापी आंदोलन शुरू होगा।
सम्मेलन में मौजूद थे अमित चावड़ा
शंकर सिंह वाघेला ने जब यह बयान दिया तो नर्मदा जिले के सागबारे में आयोजित किसान सम्मेलन में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा उनके बगल में बैठे थे। इतना ही नहीं आदिवासी समाज के बड़े नेता रहे छोटू वसावा के बड़े बेटे महेश वसावा दूसरी ओर बैठे थे। शंकर सिंह वाघेला के इस बयान के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर बापू ने इस मुद्दे को अभी क्यों उठाया। ज्वलंत मु्द्दे पर को उठाया है या फिर उनकी कोई राजनीतिक स्क्रिप्ट है। शंकर सिंह वाघेला ने 2017 में कांग्रेस छोड़ी थी। वह अब कांग्रेस में वापसी के इच्छुक बताए जा रहे हैं। वह ऐसे नेता है जो गुजरात में बीजेपी और कांग्रेस के साथ एनसीपी में भी रहे हैं।

