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‘BJP में घुटन हो रही थी’, BJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी समाजवादी पार्टी में हुए शामिल

बीजेपी से MLC टिकट न मिलने पर नाराज चल रहे डॉ. संजयन त्रिपाठी ने शनिवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया. गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक सीट से टिकट न मिलने पर वे नाराज थे और बीजेपी का झंडा उतारकर विरोध जताया था.

बीजेपी से MLC टिकट न मिलने से नाराज चल रहे डॉ. संजयन त्रिपाठी ने शनिवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है. गोरखपुर फैजाबाद स्नातक सीट से टिकट न मिलने पर वे नाराज चल रहे थे. इसके बाद उन्होंने बीजेपी का झंडा उतारकर विरोध जताया था.

झंडा उतारने के बाद से ही उनके बीजेपी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं. अब संजयन त्रिपाठी के सपा में शामिल होने के साथ ही इन सभी अटकलों को विराम लग गया है. खास बात तो ये है कि कुछ समय पहले ही डॉ. संजयन त्रिपाठी ने कहा था कि उनकी राजनीति की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर से हुई थी और उन्होंने राजनीति का सब कुछ योगी आदित्यनाथ के साथ सीखा.

उन्होंने कहा था, ‘मेरी राजनीति की शुरुआत ही गोरखनाथ मंदिर से हुई थी, मैंने राजनीति का ककहरा योगी आदित्यनाथ के साथ सीखा था.’ इस बयान के 36 घंटे बीतने से पहले ही गोरखपुर के इस बड़े नेता ने थाम लिया समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया. समाजवादी पार्टी ने फैजाबाद गोरखपुर से घोषित उम्मीदवार कमलेश यादव की जगह संजयन त्रिपाठी को प्रत्याशी घोषित किया है.

अखिलेश यादव ने पार्टी में शामिल हुए लोगों का स्वागत किया. साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने अपनी सीट छोड़ी है, उन्हें समय आने पर उचित सम्मान दिया जाएगा. शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त किया है और सबसे ज्यादा पेपर लीक हुए हैं. उनके मुताबिक, स्कूली शिक्षा की व्यवस्था भी पूरी तरह बर्बाद हो गई है और कई संस्थानों में गिरोह बन गए हैं.

‘मुझे पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया’

लखनऊ रवाना होने से पहले उन्होंने आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में अपनी नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने कहा था कि BJP का झंडा उतारने के बाद कोई उनका मनौव्वल करने भी नहीं आया. बीते दिनों उन्होंने पार्टी पर बाहरी लोगों को इंपोर्ट करने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया.

उनका कहना था कि बीजेपी में पिछले 6 सालों में उनकी मेहनत को नजरअंदाज किया गया. उन्होंने पार्टी पर उन्हें प्रत्याशी बनाने का झांसा देकर गुमराह करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘मैंने भाजपा छोड़ा नहीं है बल्कि मुझे भाजपा छोड़ने के लिए विवश किया गया था, पार्टी में ऐसे माहौल बना दिए गए थे कि मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और मुझे घुटन महसूस हो रही थी. अंत में मुझे पार्टी छोड़ना ही पड़ा.’

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल माने जा रहे इस चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी सूची जारी की है. इसमें वाराणसी स्नातक से केदारनाथ सिंह, मेरठ से दिनेश गोयल और इलाहाबाद-झांसी से अशोक कुमार राठौर को मैदान में उतारा है. वहीं वाराणसी शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद से ध्रुव त्रिपाठी को टिकट दिया गया है.

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