दिल्ली सरकार ने वकीलों की आपत्तियों के बाद 14 सितंबर की अधिसूचना के तहत नए ट्रैफिक चालान सिस्टम के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है। संशोधित नियम 167 में चालान पर आपत्ति के निपटारे के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और कोर्ट जाने से पहले 50% राशि जमा करने का प्रावधान है।
नई दिल्ली: ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए दिल्ली में लागू किए गए नए सिस्टम पर फिलहाल अस्थायी रोक लग गई है। वकीलों ने सोमवार को इसके खिलाफ दिल्ली की सातों जिला अदालतों में कामकाज का बहिष्कार करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। बुधवार को वकीलों की को-ऑर्डिनेशन कमिटी के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह से मुलाकात की। वकीलों का विरोध सेंट्रल मोटर वीइकल रूल्स में किए गए हालिया बदलावों को लेकर है।
इसमें चालान पर फैसला लेने का अधिकार न्यायिक मजिस्ट्रेटों के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों को दिए जाने से वकीलों को सख्त आपत्ति थी। SDM, ट्रांसपोर्ट और फूड एंड सप्लाई विभाग के अधिकारियों को चालान से जुड़ी आपत्तियों पर फैसला करने का अधिकार दे दिया गया था। परिवहन मंत्री ने बताया कि जब तक अधिवक्ताओं की ओर से उठाए गए मुद्दों की परिवहन विभाग जांच नहीं कर लेता, तब तक 14 सितंबर को जारी अधिसूचना के क्रियान्वयन को रोक लगा दी गई है। वहीं, वकीलों ने गुरुवार को प्रस्तावित हड़ताल टाल दी है।
वकीलों ने नए सिस्टम में चालान की आपत्ति खारिज होने के बाद अदालत का रुख करने से पहले चालान की 50 प्रतिशत राशि जमा करने की शर्त पर भी आपत्ति जताई है। संशोधित नियम 167 के तहत वाहन मालिक को चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर तय प्राधिकरण के सामने आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान है। अगर आपत्ति खारिज होती है तो अदालत जाने के लिए 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी। सरकार ने फिलहाल 14 सितंबर की अधिसूचना के अमल पर रोक लगाकर वकीलों की आपत्तियों की जांच का फैसला किया है।

