सी.आर. पाटिल के नियमों की बातों के बीच किडनी अस्पताल में एक्सटेंशन और करोड़ों के भ्रष्टाचार की चर्चा हुई तेज
अरबों रुपए का PM फंड और करोड़ों का घोटाला: सच्चाई सामने आने के डर से ‘महानगर मेट्रो’ के प्रतिनिधि को अस्पताल में प्रवेश करने से रोककर गार्ड द्वारा दी गई धमकी!
संपादक के फोन का जवाब देने से कतराते डॉ. प्रांजल मोदी पर किसका आशीर्वाद? क्या प्रधानमंत्री मोदी के सपनों को खत्म कर रहा है यह प्रशासनिक साम्राज्य?
अहमदाबाद/गांधीनगर:
गुजरात में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सी.आर. पाटिल द्वारा पूर्व में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी या अर्धसरकारी पदों पर एक्सटेंशन (सेवा विस्तार) नहीं दिया जाना चाहिए, ताकि युवा और प्रतिभाशाली युवाओं को रोजगार और आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। यदि इस नियम का पालन होता है तो यह वाकई बहुत अच्छी बात है, लेकिन जब बात अहमदाबाद की विश्व प्रसिद्ध किडनी अस्पताल की आती है, तो ये नियम केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। किडनी अस्पताल में डॉ. प्रांजल मोदी को एक्सटेंशन देकर विशेष छूट दिए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
क्या किडनी अस्पताल में चल रही है डॉ. प्रांजल मोदी की हिटलरशाही?
सूत्रों से प्राप्त बेहद चौंकाने वाली जानकारियों के अनुसार, किडनी अस्पताल में डॉ. प्रांजल मोदी का वर्चस्व इस हद तक है कि उन पर कोई नियम लागू नहीं होता और अस्पताल में कथित तौर पर ‘हिटलरशाही’ चल रही है। अस्पताल के संचालन के लिए केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों रुपए का पीएम फंड (PM Fund) आवंटित किया जाता है, लेकिन इतने बड़े फंड के मुकाबले पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है और अंदरखाने करोड़ों रुपए का घोटाला किया जा रहा है—ऐसे गंभीर आरोप सूत्रों द्वारा लगाए जा रहे हैं।
सच्चाई सामने आने के डर से ‘महानगर मेट्रो’ की टीम पर प्रतिबंध और धमकी!
जब किडनी अस्पताल के इस करोड़ों रुपए के घोटाले और गड़बड़ियों की रिपोर्ट ‘महानगर मेट्रो’ न्यूज़ पेपर में प्रकाशित हुई, तो सत्ताधारियों और अस्पताल प्रशासन में भारी हड़कंप मच गया था। अपनी काली करतूतों को छिपाने के लिए हद तो तब पार हो गई जब हमारे प्रतिनिधि इस मामले में रियालिटी चेक करने या ग्राउंड रिपोर्ट के लिए अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें अंदर प्रवेश करते ही रोक दिया गया और सुरक्षा गार्ड्स द्वारा धमकियां दी गईं!
क्या डॉ. प्रांजल मोदी और उनका प्रशासन इतना संदिग्ध है कि ‘महानगर मेट्रो’ के सवालों के जवाब वे नहीं दे सकते? यही वजह है कि ‘महानगर मेट्रो’ के संपादक द्वारा जब डॉ. प्रांजल मोदी से उनके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाने या जवाब देने की जहमत तक नहीं उठाई!
क्या किसी बड़े नेता या आरएसएस के आशीर्वाद से चल रहा है खेल?
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में ऐसी चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं कि डॉ. प्रांजल मोदी पर आरएसएस (RSS) या किसी प्रभावशाली नेता का हाथ है, जिसकी वजह से उन पर कोई कानूनी या विभागीय आंच नहीं आती। यदि देश की जनता के टैक्स के पसीने की कमाई और पीएम फंड के पैसों का इस तरह दुरुपयोग होता रहा, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ और पारदर्शी प्रशासन के सपनों को करारा झटका लगेगा।
महानगर मेट्रो का सवाल: क्या पीएमओ (PMO) इस मामले का संज्ञान लेकर उच्च स्तरीय जांच के आदेश देगा? क्या गुजरात सरकार भ्रष्टाचार के इस दलदल के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाएगी या फिर गुजरात के आम मरीजों और जनता को इस भ्रष्टाचार की भट्टी में झोंके जाते हुए देखती रहेगी? हमारी आवाज अब सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचनी ही चाहिए!

