सार्वजनिक कर सड़कों पर बह गया और वहीवटदार का पेट भी नहीं हिला: अहमदाबाद से सूरत तक सड़क-पुल घोटाले का बड़ा पर्दाफ़ाश!
अहमदाबाद। गांधी के गुजरात में, आम नागरिक ईमानदारी से अपनी मेहनत की कमाई से हर महीने आय कर, जीएसटी, सड़क कर और निगम कर देता है। लेकिन उसी नागरिक को बदले में क्या मिलता है? टूटी सड़कें, पहली बारिश में बह जाने वाले करोड़ों के ओवरब्रिज, और भारी ट्रैफिक जाम! अहमदाबाद के पॉश इलाकों से लेकर सूरत के डायमंड हब तक, आज हर जगह एक ही सवाल गूंज रहा है: “हम जो करोड़ों रुपये का कर देते हैं, वे कहां जाते हैं?”
कागज़ पर ‘मॉडल राज्य’, लेकिन ज़मीन पर दलाली का खेल!
हाल ही में, निगम द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई नई सड़कें और पुल पहली ही बारिश में बह चुके हैं। आम आदमी गड्ढों वाली सड़कों से गुज़रते हुए कमर दर्द और दुर्घटना के डर से परेशान है, जबकि इन सड़कों को बनाने वाले ठेकेदार और उन्हें पास करने वाले भ्रष्ट सरकारी अफ़सर करोड़ों रुपये दलाली लेकर वातानुकूलित कार्यालय में चैन से बैठे हैं। ठेकेदार और अफ़सरों की मिलीभगत: घटिया सामग्री इस्तेमाल करके करोड़ों के टेंडर पास किए जाते हैं। सिर्फ़ काली सूची में डालने का नाटक: कागज़ों पर कंपनियों को काली सूची में डालने की बात होती है, लेकिन पर्दे के पीछे उन्हीं भ्रष्ट ठेकेदार को अलग-अलग नामों से नए अनुबंध दिए जाते हैं! प्रजा रामभरोसे: जब नेताओं और बड़े अफ़सरों के काफ़िले निकलते हैं, तो सड़कों से कुत्ते, मवेशी या गड्ढे गायब हो जाते हैं, लेकिन आम नागरिक सही-सलामत घर पहुँचेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं!
कर संग्रह में शेर जैसा तंत्र, सेवा देने में घटिया!
अगर कोई नागरिक संपत्ति कर या बिजली का बिल भरने में एक दिन भी देरी करे, तो वहीवटदार तुरंत नोटिस भेजकर उसे सील करने की धमकी देता है। कार खरीदते समय कर, पेट्रोल-डीज़ल भरवाते समय कर, और उसी कार को सड़क पर चलाने पर हर कुछ किलोमीटर पर भारी चुंगी कर! लेकिन इतने सारे कर देने के बाद, जब कोई नागरिक पीने का साफ़ पानी, अच्छी सड़कें या सरकारी अस्पताल में सही इलाज मांगता है, तो वहीवटदार चुप रहता है। लोगों का तीखा सवाल: “यह कोई उपहार नहीं है, यह हमारे हक़ की कमाई है!” जब भी कोई नया पुल या सरकारी भवन का उद्घाटन होता है, तो नेता ऐसे भाषण देते हैं जैसे वे जनता पर कोई एहसान या ‘उपहार’ दे रहे हों! लेकिन गुजरात का जागरूक नागरिक अब समझ गया है कि यह किसी नेता के मामा के घर की संपत्ति नहीं है, यह इस देश के करोड़ों करदाताओं के खून-पसीने की कमाई है। अब जनता का सवाल सीधा और साफ़ है: “हम सारे कर और सारे चुंगी देते हैं… तो हमें अच्छी सेवा और सुरक्षित सड़कें कब मिलेंगी?”

