जिंदगी जीने का असली मजा तभी है, जब चारों तरफ मुश्किलों का पहरा हो, तनाव अपनी चरम सीमा पर हो और नसों में दर्द बह रहा हो… फिर भी, आप उन भयानक कठिनाइयों की आंखों में आंखें डालकर, सीना तानकर खड़े रहें और एक कातिलाना मुस्कान के साथ कहें—’ले, इसका भी खेल खत्म! अब बोल, अगला शिकार कौन सा है?’
ज्यादातर लोग शांत समंदर में नाव चलाकर खुद को कुशल नाविक समझ बैठते हैं। पर सच्चा नाविक वह है जो समंदर के सबसे भयंकर तूफान को भी खेल समझकर उससे टकरा जाए। जीवन में जब सारे रास्ते बंद हो जाएं, तभी इंसान के असली अस्तित्व की शुरुआत होती है। यह कायरता की राख से एक शेर की तरह उठ खड़े होने की ललकार है।
समंदर के बीचों-बीच अकेला खड़ा लाइटहाउस (दीपस्तंभ) देखिए। रात के घने अंधेरे में जब समंदर की काली, पहाड़ जैसी ऊंची लहरें पूरी ताकत से उससे टकराती हैं, तो पूरा लाइटहाउस थरथरा उठता है। चारों तरफ से उसे डुबो देने के हमले होते हैं। लेकिन, वह लाइटहाउस अपनी नींव कभी नहीं छोड़ता। वह लहरों के हर प्रहार को झेलता है और बदले में दुनिया को और भी तेज रोशनी देता है। जिंदगी के तूफानों में आपको भी वही लाइटहाउस बनना है—चाहे कितने भी थपेड़े लगें, आपका आत्मविश्वास रूपी प्रकाश कभी धुंधला नहीं पड़ना चाहिए।
कोयले की खान में करोड़ों टन वजन और धरती के भीतर की असहनीय गर्मी जब किसी कार्बन पर लगातार दबाव डालती है, तो वह कुचलकर राख नहीं बनता; बल्कि उसी भयानक दबाव की बदौलत वह दुनिया का सबसे मजबूत तत्व—”हीरा” बन जाता है। जिसे दुनिया का कोई हथियार नहीं काट सकता, उल्टे वह दूसरों को तराशने की ताकत रखता है। जब जिंदगी में तनाव और समस्याओं का दबाव बढ़े, तो समझ लीजिए कि कुदरत आपको मिटाना नहीं चाहती, बल्कि आपके कमजोर मन को तोड़कर आपको एक अटूट ‘हीरा’ बनाना चाहती है।
अपने आप से कहिए—मुश्किलों की औकात क्या जो मेरा इम्तिहान लें? मैं तो वह शोला हूं, जो अंगारों पर कदम रखकर पूरी तकदीर का नक्शा बदलने का दम रखता है। भले ही दुनिया भर की मुसीबतें मुझे घेर लें, मेरी हिम्मत के आगे हर मुश्किल को घुटने टेकने ही पड़ेंगे! जब जिंदगी आपको गिराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दे, तो समझ लेना कि खेल अब रोमांचक हो चुका है। अब या तो यह जिंदगी जीतेगी, या फिर मेरा इतिहास लिखा जाएगा!
जब मुश्किलें खुद थक जाएं
इस संसार का एक कड़वा और अटल सच है—जो डरता है, उसे ही लोग और डराते हैं। जो हालात के आगे झुक जाता है, मुश्किलें उसी पर सवार हो जाती हैं। लेकिन जिस पल आप आंखों में अंगारे भरकर उठ खड़े होते हैं और ठान लेते हैं कि “अब चाहे जो हो जाए, पीछे हटना मंजूर नहीं”, ठीक उसी पल आधी मुश्किलें अपना रास्ता बदल लेती हैं। समस्याएं भी उस शिकारी की तरह होती हैं जो कमजोर जानवर पर हमला करती हैं; एक बब्बर शेर के सामने खड़े होने की औकात उनकी भी नहीं होती।
जब तकलीफ आए, तो रोने बैठने के बजाय उसे एक चुनौती की तरह स्वीकार कीजिए। जैसे-जैसे धड़कनें बढ़ें, अपनी हिम्मत को और ऊंचा उठाइए। तनाव और दर्द इस बात का सुबूत हैं कि आप अभी जिंदा हैं; मरे हुए इंसान को कोई समस्या नहीं सताती। अंतिम विजय निश्चित रूप से आपकी ही होगी, हिसाब बिल्कुल बराबर होगा—बस शर्त इतनी है कि आपको मैदान छोड़कर भागना नहीं है।
जिंदगी की कोई ताकत, कोई इंसान या कोई भी परिस्थिति आपको तब तक नहीं हरा सकती, जब तक आप खुद अंदर से हार न मान लें। इसीलिए, जब भी मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़े, तो एक बेपरवाह हंसी के साथ शेर की तरह गरज कर कहिए—”…बस इतना ही? चल, कोई और बड़ी मुश्किल भेज, यह तो मेरे बाएं हाथ का खेल है!” जिस दिन यह दहकती हुई आग आपके भीतर पैदा हो गई, उस दिन आप अजेय बन जाएंगे।
दर्शना पटेल (नेशनल मेडलिस्ट, नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित) स्पोर्ट्स टीचर

