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दारूबंदी के दावों के बीच वलसाड में भाजपा के ही नेता निकले देशी शराब के ‘सौदागर’!

सरपंच और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारी पर शराब के अवैध कारोबार का आरोप, पुलिस कार्रवाई के बाद सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों पर उठे सवाल

वलसाड। गुजरात में दारूबंदी के कड़े अमल के दावे करने वाली भाजपा सरकार के सामने वलसाड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। वलसाड में पुलिस की कार्रवाई के दौरान सत्ताधारी भाजपा से जुड़े लोगों के कथित तौर पर देशी शराब के अवैध कारोबार में शामिल होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि शराब के इस कथित अड्डे से जुड़े लोगों में एक स्थानीय सरपंच और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का एक पदाधिकारी भी शामिल है।

इस मामले के सामने आने के बाद गुजरात सरकार के दारूबंदी कानून और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को लेकर विपक्ष की ओर से भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

सरपंच और भाजपा पदाधिकारी के नाम सामने आने से मचा हड़कंप

वलसाड में पुलिस की छापेमारी के बाद शराब के कथित अवैध कारोबार को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। आरोप है कि इस कारोबार से जुड़े प्रमुख लोगों में एक स्थानीय सरपंच और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का पदाधिकारी शामिल था।

मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि जिन लोगों पर कथित रूप से अवैध शराब कारोबार से जुड़े होने के आरोप लगे हैं, वे राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार पदों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

दारूबंदी कानून और सरकार के दावों पर उठे सवाल

गुजरात में दारूबंदी कानून के कड़े पालन को लेकर सरकार लगातार अपनी नीति और कार्रवाई का हवाला देती रही है। ऐसे में सत्ताधारी दल से जुड़े पदाधिकारियों के कथित रूप से अवैध शराब कारोबार से जुड़े होने की खबर सामने आने के बाद सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

विपक्ष और स्थानीय स्तर पर अब यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि दारूबंदी कानून सभी के लिए समान है, तो राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ भी क्या उतनी ही सख्ती से कार्रवाई की जाएगी?

हर्ष संघवी और भूपेंद्र पटेल से पूछे जा रहे सीधे सवाल

मामले के बाद गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार की दारूबंदी नीति को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

सवाल 1:* क्या भाजपा से जुड़े नेताओं और पदाधिकारियों पर भी दारूबंदी कानून उसी तरह लागू होगा जैसे आम नागरिकों पर होता है?

सवाल 2:* यदि सत्ताधारी दल से जुड़े किसी पदाधिकारी पर अवैध शराब कारोबार में शामिल होने का आरोप सामने आता है, तो पार्टी नेतृत्व की ओर से क्या कार्रवाई की जाएगी?

सवाल 3:* क्या इतने बड़े स्तर पर कथित अवैध शराब कारोबार के पीछे किसी अन्य व्यक्ति या तंत्र की भी भूमिका थी? इसकी जांच कितनी गहराई तक जाएगी?

अब कार्रवाई पर रहेगी सबकी नजर

इस पूरे मामले में अब पुलिस की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सवाल यह भी है कि क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी या मामला केवल एफआईआर तक सीमित रह जाएगा।

वलसाड में सामने आए इस मामले ने एक बार फिर गुजरात की दारूबंदी व्यवस्था, अवैध शराब के कारोबार और राजनीतिक पदाधिकारियों की कथित भूमिका को लेकर बहस छेड़ दी है। अब लोगों की नजर पुलिस जांच और भाजपा संगठन की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम पर टिकी है।

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