नितिन गडकरी राजनीति से संन्यास लेने जा रहे हैं। यह अटकलें तेज हो गई हैं। नागपुर के कटोल में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने ऐसा कुछ कहा, जिसके बाद उनके सियासी रिटायरमेंट की चर्चा शुरू हो गई है। नितिन गडकरी ने कहा कि वह अब ज्यादा काम नहीं कर सकते और नई पीढ़ी को मौका दिया जाना चाहिए।
नागपुर : केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार और मंत्रियों के विभागों में बदलाव की अटकलें तेज हैं। इसी बीच परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का एक बयान सामने आया है। वह लगातार इस तरह के बयान दे रहे हैं। वह सार्वजनिक सभाओं में खुलेआम ऐसे भाषण दे रहे हैं जिससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि नितन गडकरी राजनीति से संन्यास ले सकते हैं। अब नागपुर के एक प्रोग्राम में भी उन्होंने इसी तरह की बात कही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में उनके रिटायरमेंट को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री गडकरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में एक वरिष्ठ मंत्री हैं और देश भर में एक्सप्रेसवे और सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपने काम के लिए चर्चा में रहे हैं। हालांकि, हाल के महीनों में गडकरी को कई मुद्दों पर आलोचना का भी सामना करना पड़ा है।
इथेनॉल को लेकर विवादों में नितिन गडकरी
नितिन गडकरी ने लगातार इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की वकालत की है, जबकि कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि इथेनॉल-मिश्रित ईंधन से गाड़ियों को नुकसान हो रहा है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर मंत्री को घेरा है। उनके बेटे की इथेनॉल से संबंधित कंपनी है। विपक्ष का आरोप है कि बेटे की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नितिन गडकरी इथेनॉल की वकालत कर रहे हैं।
नई पीढ़ी को मौका देने की कही बात
नागपुर जिले के काटोल में एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण कक्षा में बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा, ‘मैं पिछले 30 सालों से सार्वजनिक जीवन में लगातार काम कर रहा हूं। मैंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और कई पुरस्कार भी पाए हैं। लेकिन अब मैं ज्यादा काम नहीं कर सकता, नई पीढ़ी को काम करने का मौका दिया जाना चाहिए।’ नई पीढ़ी को मौका देने के बारे में उनकी बातों से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं; कुछ लोग इसे उनके राजनीति से संन्यास लेने का संकेत मान रहे हैं। हालांकि, गडकरी ने संन्यास के बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
रोजमर्रा की दिनचर्या में बदलाव
नितिन गडकरी ने कोविड-19 महामारी के बाद अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या और जीवनशैली में आए बदलावों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि पहले, पार्टी का काम करते समय मैं समोसे खाता था और कहीं भी सो जाता था। लेकिन कोरोना काल के बाद, मैं अनुशासित हो गया हूं और अब रोजाना बिना चूके योग करता हूं। अगर आपकी सेहत अच्छी नहीं है, तो सत्ता और पद का कोई फायदा नहीं है।
किसानों का कल्याण
केंद्रीय मंत्री ने किसानों की आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या पर भी चिंता जताई और कहा कि वह आने वाले वर्षों में किसानों के कल्याण के लिए और अधिक काम करना चाहते हैं।

