अहमदाबाद: गुजरात की राजनीति को लेकर सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। साल 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले गुजरात का राजनीतिक नक्शा पूरी तरह से बदल सकता है। केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया को तेज करने की हलचल के बीच, गुजरात में लोकसभा सीटों की संख्या में भारी उछाल आने की संभावना जताई जा रही है।
क्या है पूरी योजना?
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार साल 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया शुरू करने पर विचार कर रही है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य ‘महिला आरक्षण अधिनियम, 2023’ (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को 2029 के चुनावों से पहले लागू करना है। यदि यह सुधार विधेयक पूरी तरह प्रभावी होता है, तो देश में लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 816 तक पहुँच सकती हैं।
ગુજરાત में क्या बदलाव होंगे?
गुजरात के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में गुजरात में लोकसभा की 26 सीटें हैं, लेकिन नए परिसीमन के बाद यह आंकड़ा काफी बढ़ सकता है:
- सीटों में बढ़ोत्तरी: विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात में सीटों की संख्या में 50% तक की वृद्धि हो सकती है। यानी 26 सीटें बढ़कर 39 से 40 के करीब हो सकती हैं।
- महिला आरक्षण: बढ़ी हुई नई सीटों में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
- निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा: अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे बड़े शहरों में जनसंख्या वृद्धि के कारण नए निर्वाचन क्षेत्र अस्तित्व में आएंगे। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की सीमाओं में भी व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।
क्यों लिया जा रहा है यह निर्णय? - जनसंख्या का प्रतिनिधित्व: 1971 के बाद से लोकसभा सीटों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। वर्तमान जनसंख्या के अनुपात में मतदाताओं को सही प्रतिनिधित्व मिले, इसके लिए यह प्रक्रिया जरूरी है।
- महिला आरक्षण: संसद में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए परिसीमन एक अनिवार्य शर्त है।
- राजनीतिक वर्चस्व: अधिक सीटों का अर्थ है कि राष्ट्रीय राजनीति में गुजरात जैसे राज्यों की भूमिका और भी अधिक निर्णायक और मजबूत होगी।
कब तक होगा लागू?
सरकार इस संबंध में वर्तमान बजट सत्र या किसी विशेष सत्र में सुधार विधेयक ला सकती है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो 2029 का लोकसभा चुनाव नए नक्शे और नई सीटों के साथ लड़ा जाएगा।
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